बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लोकहुँ बेद सुसाहिब रीतीं। बिनय सुनत पहिचानत प्रीती।।
मूल पाठ
लोकहुँ बेद सुसाहिब रीतीं। बिनय सुनत पहिचानत प्रीती।।
गनी गरीब ग्रामनर नागर। पंडित मूढ़ मलीन उजागर।।
स्रोत अभिलेख 1.28 · पुस्तक पृ. 49, 50
भावार्थ
मूल पाठ के बादलोक और वेदमें भी अच्छे स्वामीकी यही रीति प्रसिद्ध है कि वह विनय सुनते ही प्रेमको पहचान लेता है। अमीर-गरीब, गँवार-नगरनिवासी, पण्डित-मूर्ख, बदनाम-यशस्वी,॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 49 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लोकहुँ बेद सुसाहिब रीतीं। बिनय सुनत पहिचानत प्रीती।।
English explanation
In worldly practice and in the Vedas, a good master’s way is to hear supplication and recognize love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोकहुँ | लोक में भी | in worldly practice too |
| बेद | वेदों में | in the Vedas |
| सुसाहिब | अच्छे स्वामी की | of a good master |
| रीतीं | रीति | custom |
| बिनय | विनती | supplication |
| सुनत | सुनते हैं | hears |
| पहिचानत | पहचानते हैं | recognizes |
| प्रीती | प्रेम | love |
2 गनी गरीब ग्रामनर नागर। पंडित मूढ़ मलीन उजागर।।
English explanation
Rich and poor, villagers and townspeople, learned and foolish, disreputable and distinguished—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गनी | धनी | the wealthy |
| गरीब | गरीब | the poor |
| ग्रामनर | गाँव के लोग | village folk |
| नागर | नगरवासी | townspeople |
| पंडित | विद्वान | the learned |
| मूढ़ | मूर्ख | the foolish |
| मलीन | मलिन या बदनाम लोग | the disreputable |
| उजागर | उज्ज्वल कीर्तिवाले | the distinguished |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 49
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 49, 50
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।