बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे (श्रीरामजी) मेरी [बिगड़ी] सब तरहसे सुधार लेंगे; जिनकी कृपा कृपा करनेसे नहीं अघाती। राम-से उत्तम स्वामी और मुझ-सरीखा बुरा सेवक! इतनेपर भी उन दयानिधिने अपनी ओर देखकर मेरा पालन किया है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 49 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती।।
राम सुस्वामि कुसेवकु मोसो। निज दिसि दैखि दयानिधि पोसो।।
स्रोत अभिलेख 1.28 · पुस्तक पृ. 49, 50
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती।।
English explanation
He will improve my composition in every way—he whose grace never tires of bestowing grace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोरि | मेरी कथा को | my composition |
| सुधारिहि | सुधारेंगे | will improve |
| सो | वे राम | he, Rama |
| सब | सभी | every |
| भाँती | प्रकार से | in ways |
| जासु | जिनकी | whose |
| कृपा | कृपा | grace |
| नहिं | नहीं | never |
| कृपाँ | कृपा करने से | through bestowing grace |
| अघाती | तृप्त होती | becomes satiated |
2 राम सुस्वामि कुसेवकु मोसो। निज दिसि दैखि दयानिधि पोसो।।
English explanation
Rama is an excellent master, while I am a poor servant; that treasury of compassion sustains me, looking to his own responsibility as master.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम | Rama |
| सुस्वामि | उत्तम स्वामी | an excellent master |
| कुसेवकु | बुरा सेवक | a poor servant |
| मोसो | मेरे जैसा | like me |
| निज | अपनी | his own |
| दिसि | ओर, अर्थात स्वामी-धर्म | side, meaning his duty as master |
| दैखि | देखकर | considering |
| दयानिधि | दया के भंडार | the treasury of compassion |
| पोसो | पालन करते हैं | sustains me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 49
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 49, 50
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।