बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भायँ कुभायँ अनख आलसहूँ। नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअच्छे भाव (प्रेम) से, बुरे भाव (वैर) से, क्रोधसे या आलस्यसे, किसी तरहसे भी नाम जपनेसे दसों दिशाओंमें कल्याण होता है। उसी (परम कल्याणकारी) रामनामका स्मरण करके और श्रीरघुनाथजीको मस्तक नवाकर मैं रामजीके गुणोंका वर्णन करता हूँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 49 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भायँ कुभायँ अनख आलसहूँ। नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ।।
सुमिरि सो नाम राम गुन गाथा। करउँ नाइ रघुनाथहि माथा।।
स्रोत अभिलेख 1.28 · पुस्तक पृ. 49, 50
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भायँ कुभायँ अनख आलसहूँ। नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ।।
English explanation
Whether uttered with love, ill will, anger, or even laziness, repeating the Name brings auspiciousness in all ten directions. (AI draft translation.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भायँ | प्रेमभाव से | with loving feeling |
| कुभायँ | बुरे भाव से | with ill will |
| अनख | क्रोध से | in anger |
| आलसहूँ | आलस्य से भी | even out of laziness |
| नाम | राम का नाम | Rama’s name |
| जपत | जपने पर | on repeating |
| मंगल | कल्याण होता है | auspiciousness results |
| दिसि | दिशाओं में | in the directions |
| दसहूँ | सभी दसों | all ten |
2 सुमिरि सो नाम राम गुन गाथा। करउँ नाइ रघुनाथहि माथा।।
English explanation
Remembering that Name and bowing my head to Rama, lord of Raghu’s lineage, I narrate Rama’s virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमिरि | स्मरण करके | having remembered |
| सो | उस | that |
| नाम | नाम को | Name |
| राम | भगवान राम के | of Rama |
| गुन | गुणों की | of the virtues |
| गाथा | कथा | narrative |
| करउँ | मैं करता हूँ | I compose |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| रघुनाथहि | रघुकुल के स्वामी राम को | to Rama, lord of Raghu’s lineage |
| माथा | सिर | my head |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 49
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 49, 50
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।