बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लेहु नयन भरि रूप निहारी। प्रिय पाहुने भूप सुत चारी।।
मूल पाठ
लेहु नयन भरि रूप निहारी। प्रिय पाहुने भूप सुत चारी।।
को जानै केहि सुकृत सयानी। नयन अतिथि कीन्हे बिधि आनी।।
स्रोत अभिलेख 1.335 · पुस्तक पृ. 319, 319
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाके चारों पुत्र, इन प्यारे मेहमानोंके [मनोहर] रूपको नेत्र भरकर देख लो। हे सयानी! कौन जाने, किस पुण्यसे विधाताने इन्हें यहाँ लाकर हमारे नेत्रोंका अतिथि किया है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 319 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लेहु नयन भरि रूप निहारी। प्रिय पाहुने भूप सुत चारी।।
English explanation
Gaze to your eyes' content upon the beauty of these dear guests, King Dasharatha's four sons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लेहु | देख लो | take in |
| नयन | आँखें | eyes |
| भरि | भरकर | to their content |
| रूप | सुंदर रूप | beauty |
| निहारी | निहारकर | by gazing upon |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| पाहुने | अतिथि | guests |
| भूप | राजा दशरथ के | of King Dasharatha |
| सुत | पुत्र | sons |
| चारी | चारों | all four |
2 को जानै केहि सुकृत सयानी। नयन अतिथि कीन्हे बिधि आनी।।
English explanation
O wise friend, who knows through what merit the Creator brought them here and made them guests of our eyes!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| को | कौन | who |
| जानै | जानता है | knows |
| केहि | किस | through what |
| सुकृत | पुण्य से | merit |
| सयानी | हे सयानी सखी | O wise friend |
| नयन | आँखों के | of the eyes |
| अतिथि | अतिथि | guests |
| कीन्हे | बना दिया | made them |
| बिधि | विधाता ने | the Creator |
| आनी | लाकर | having brought them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.335
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 319
- सहायक विषय
- श्रीसीता-राम-विवाह
- मुद्रित पृष्ठ
- 319, 319
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।