बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लेहु छड़ाइ सीय कह कोऊ। धरि बाँधहु नृप बालक दोऊ।।
मूल पाठ
लेहु छड़ाइ सीय कह कोऊ। धरि बाँधहु नृप बालक दोऊ।।
तोरें धनुषु चाड़ नहिं सरई। जीवत हमहि कुअँरि को बरई।।
स्रोत अभिलेख 1.266 · पुस्तक पृ. 256, 257
भावार्थ
मूल पाठ के बादकोई कहते हैं, सीताको छीन लो और दोनों राजकुमारोंको पकड़कर बाँध लो। धनुष तोडऩेसे ही चाह नहीं सरेगी (पूरी होगी)। हमारे जीते-जी राजकुमारीको कौन ब्याह सकता है?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 256 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 लेहु छड़ाइ सीय कह कोऊ। धरि बाँधहु नृप बालक दोऊ।।
English explanation
Someone says, “Snatch Sita away! Seize and bind both princes!”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लेहु | ले लो | take her |
| छड़ाइ | छीनकर; छुड़ाकर | by snatching her away |
| सीय | सीता को | Sita |
| कह | कहता है | says |
| कोऊ | कोई राजा | one of the kings |
| धरि | पकड़कर | having seized |
| बाँधहु | बाँध दो | bind them |
| नृप | राजा के; राजवंश के | royal |
| बालक | बालक; कुमार | young princes |
| दोऊ | दोनों | both |
2 तोरें धनुषु चाड़ नहिं सरई। जीवत हमहि कुअँरि को बरई।।
English explanation
“Merely breaking the bow will not fulfill that desire. Who can marry the princess while we are still alive?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तोरें | तोड़ देने से | by breaking |
| धनुषु | धनुष | the bow |
| चाड़ | अभिलाषा; चाह | desire |
| नहिं | नहीं | not |
| सरई | पूरी होगी | will be fulfilled |
| जीवत | जीवित रहते | while alive |
| हमहि | हमारे ही | we ourselves |
| कुअँरि | राजकुमारी सीता को | the princess Sita |
| को | कौन | who |
| बरई | वरण करेगा; ब्याहेगा | will marry |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.266
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 256
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 256, 257
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।