बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब सिय देखि भूप अभिलाषे। कूर कपूत मूढ़ मन माखे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउस समय सीताजीको देखकर कुछ राजा लोग ललचा उठे। वे दुष्ट, कुपूत और मूढ़ राजा मनमें बहुत तमतमाये। वे अभागे उठ-उठकर, कवच पहनकर, जहाँ-तहाँ गाल बजाने लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 256 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तब सिय देखि भूप अभिलाषे। कूर कपूत मूढ़ मन माखे।।
उठि उठि पहिरि सनाह अभागे। जहँ तहँ गाल बजावन लागे।।
स्रोत अभिलेख 1.266 · पुस्तक पृ. 256, 257
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब सिय देखि भूप अभिलाषे। कूर कपूत मूढ़ मन माखे।।
English explanation
Then, seeing Sita, the kings desired to win her. Those cruel, unworthy, foolish men grew angry at heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| सिय | सीता को | Sita |
| देखि | देखकर | having seen |
| भूप | राजा | the kings |
| अभिलाषे | पाने की अभिलाषा करने लगे | began desiring to win her |
| कूर | क्रूर | cruel |
| कपूत | कुपुत्र; कुल के अयोग्य पुत्र | unworthy sons of their families |
| मूढ़ | मूर्ख | foolish |
| मन | मन में | in their hearts |
| माखे | क्रोधित हुए | grew angry |
2 उठि उठि पहिरि सनाह अभागे। जहँ तहँ गाल बजावन लागे।।
English explanation
Those ill-fated kings rose one after another, put on armor, and began boasting here and there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उठि | उठकर | rising |
| उठि | बार-बार उठकर | rising one after another |
| पहिरि | पहनकर | having put on |
| सनाह | कवच | armor |
| अभागे | अभागे राजा | the ill-fated kings |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| तहँ | तहाँ; वहाँ | there |
| गाल | डींगों की बातें | boastful talk |
| बजावन | हाँकने; बकने | to spout |
| लागे | लगे | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.266
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 256
- सहायक विषय
- जयमाल पहनाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 256, 257
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