बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लही न कतहुँ हारि हियँ मानी। इन्ह सम एइ उपमा उर आनी।।
मूल पाठ
लही न कतहुँ हारि हियँ मानी। इन्ह सम एइ उपमा उर आनी।।
सामध देखि देव अनुरागे। सुमन बरषि जसु गावन लागे।।
स्रोत अभिलेख 1.32 · पुस्तक पृ. 301, 301
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब कहीं भी उपमा नहीं मिली, तब हृदयमें हार मानकर उन्होंने मनमें यही उपमा निश्चित की कि इनके समान ये ही हैं। समधियोंका मिलाप या परस्पर सम्बन्ध देखकर देवता अनुरक्त हो गये और फूल बरसाकर उनका यश गाने लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 301 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लही न कतहुँ हारि हियँ मानी। इन्ह सम एइ उपमा उर आनी।।
English explanation
Finding no comparison anywhere, the poets inwardly conceded defeat and settled on this: these two are comparable only to themselves.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लही | मिली | was found |
| न | नहीं | not |
| कतहुँ | कहीं भी | anywhere |
| हारि | हार | defeat |
| हियँ | हृदय में | in their hearts |
| मानी | स्वीकार की | accepted |
| इन्ह | इन दोनों राजाओं के | to these two kings |
| सम | समान | equal |
| एइ | ये स्वयं ही | these very two themselves |
| उपमा | उपमा | comparison |
| उर | मन में | to mind |
| आनी | लाई; सोची | brought; conceived |
2 सामध देखि देव अनुरागे। सुमन बरषि जसु गावन लागे।।
English explanation
Seeing the two fathers related through their children’s marriage, the gods were filled with affection and began showering flowers and singing their praise. (The reading ‘सामध’ is uncertain.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सामध | दोनों समधियों को | the two fathers joined by their children’s marriage |
| देखि | देखकर | on seeing |
| देव | देवता | the gods |
| अनुरागे | प्रेम से भर गए | were filled with affection |
| सुमन | फूल | flowers |
| बरषि | बरसाकर | showering |
| जसु | यश | praise |
| गावन | गाने | to sing |
| लागे | लगे | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 301
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 301, 301
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।