बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मिले जनकु दसरथु अति प्रीतीं। करि बैदिक लौकिक सब रीतीं।।
मूल पाठ
मिले जनकु दसरथु अति प्रीतीं। करि बैदिक लौकिक सब रीतीं।।
मिलत महा दोउ राज बिराजे। उपमा खोजि खोजि कबि लाजे।।
स्रोत अभिलेख 1.32 · पुस्तक पृ. 301, 301
भावार्थ
मूल पाठ के बादवैदिक और लौकिक सब रीतियाँ करके जनकजी और दशरथजी बड़े प्रेमसे मिले। दोनों महाराज मिलते हुए बड़े ही शोभित हुए, कवि उनके लिये उपमा खोज-खोजकर लजा गये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 301 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मिले जनकु दसरथु अति प्रीतीं। करि बैदिक लौकिक सब रीतीं।।
English explanation
AI-draft meaning: Having observed all Vedic and customary rites, Janaka and Dasharatha met with great affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिले | मिले | met |
| जनकु | राजा जनक, सीता के पिता | King Janaka, Sita’s father |
| दसरथु | राजा दशरथ, राम के पिता | King Dasharatha, Rama’s father |
| अति | अत्यंत | very great |
| प्रीतीं | प्रेम से | with affection |
| करि | करके | having performed |
| बैदिक | वेदों के अनुसार | Vedic |
| लौकिक | लोक-परंपरा के अनुसार | customary |
| सब | सभी | all |
| रीतीं | रीतियाँ | rites and observances |
2 मिलत महा दोउ राज बिराजे। उपमा खोजि खोजि कबि लाजे।।
English explanation
As they met, both great kings appeared splendid. Poets searched repeatedly for a comparison and were left abashed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिलत | मिलते समय | while meeting |
| महा | महान | great |
| दोउ | दोनों | both |
| राज | राजा | kings |
| बिराजे | शोभायमान हुए | appeared splendid |
| उपमा | तुलना के लिए उपमान | a fitting comparison |
| खोजि | खोजकर | searching |
| खोजि | बार-बार खोजकर | searching again |
| कबि | कवि | poets |
| लाजे | लज्जित हुए | were abashed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 301
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 301, 301
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।