बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लच्छन सब बिचारि उर राखे। कछुक बनाइ भूप सन भाषे।।
मूल पाठ
लच्छन सब बिचारि उर राखे। कछुक बनाइ भूप सन भाषे।।
सुता सुलच्छन कहि नृप पाहीं। नारद चले सोच मन माहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.131 · पुस्तक पृ. 141, 142
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब लक्षणोंको विचारकर मुनिने अपने हृदयमें रख लिया और राजासे कुछ अपनी ओरसे बनाकर कह दिया। राजासे लड़कीके सुलक्षण कहकर नारदजी चल दिये। पर उनके मनमें यह चिन्ता थी कि—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 141 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लच्छन सब बिचारि उर राखे। कछुक बनाइ भूप सन भाषे।।
English explanation
After considering all the marks, Narada kept their implications to himself and said something suitably framed to the king.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लच्छन | शुभ लक्षण | auspicious marks |
| सब | सभी | all |
| बिचारि | विचार करके | having considered |
| उर | हृदय में | in his heart |
| राखे | रख लिए | kept |
| कछुक | कुछ | something |
| बनाइ | बात बनाकर | having suitably framed his words |
| भूप | राजा | the king |
| सन | से | to |
| भाषे | कहा | said |
2 सुता सुलच्छन कहि नृप पाहीं। नारद चले सोच मन माहीं।।
English explanation
After telling the king that his daughter had auspicious marks, Narada departed, pondering in his mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुता | पुत्री | daughter |
| सुलच्छन | शुभ लक्षणों वाली | endowed with auspicious marks |
| कहि | कहकर | having said |
| नृप | राजा | the king |
| पाहीं | के पास; यहाँ: से | in his presence; here, to |
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| चले | चल पड़े | departed |
| सोच | विचार | pondering |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.131
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 141
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 141, 142
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।