बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जो एहि बरइ अमर सोइ होई। समरभूमि तेहि जीत न कोई।।
मूल पाठ
जो एहि बरइ अमर सोइ होई। समरभूमि तेहि जीत न कोई।।
सेवहिं सकल चराचर ताही। बरइ सीलनिधि कन्या जाही।।
स्रोत अभिलेख 1.131 · पुस्तक पृ. 141, 142
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[लक्षणोंको सोचकर वे मनमें कहने लगे कि] जो इसे ब्याहेगा, वह अमर हो जायगा और रणभूमिमें कोई उसे जीत न सकेगा। यह शीलनिधिकी कन्या जिसको वरेगी, सब चर-अचर जीव उसकी सेवा करेंगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 141 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जो एहि बरइ अमर सोइ होई। समरभूमि तेहि जीत न कोई।।
English explanation
Whoever marries this maiden will become immortal; no one will defeat him on the battlefield.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| एहि | इस कन्या को | this maiden |
| बरइ | विवाह में वरेगा | marries |
| अमर | अमर | immortal |
| सोइ | वही | that very person |
| होई | होगा | will become |
| समरभूमि | युद्धभूमि में | on the battlefield |
| तेहि | उसे | him |
| जीत | जीत सकेगा | will defeat |
| न | नहीं | not |
| कोई | कोई | anyone |
2 सेवहिं सकल चराचर ताही। बरइ सीलनिधि कन्या जाही।।
English explanation
All moving and unmoving beings will serve the man whom King Shilanidhi’s daughter chooses as her husband.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेवहिं | सेवा करेंगे | will serve |
| सकल | समस्त | all |
| चराचर | चल और अचल प्राणी | moving and unmoving beings |
| ताही | उसी की | that very man |
| बरइ | पति चुनेगी | chooses as husband |
| सीलनिधि | राजा शीलनिधि की | King Shilanidhi’s |
| कन्या | पुत्री | daughter |
| जाही | जिसे | whom |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.131
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 141
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 141, 142
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।