बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि रूप मुनि बिरति बिसारी। बड़ी बार लगि रहे निहारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउसके रूपको देखकर मुनि वैराग्य भूल गये और बड़ी देरतक उसकी ओर देखते ही रह गये। उसके लक्षण देखकर मुनि अपने-आपको भी भूल गये और हृदयमें हॢषत हुए, पर प्रकटरूपमें उन लक्षणोंको नहंीं कहा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 141 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
देखि रूप मुनि बिरति बिसारी। बड़ी बार लगि रहे निहारी।।
लच्छन तासु बिलोकि भुलाने। हृदयँ हरष नहिं प्रगट बखाने।।
स्रोत अभिलेख 1.131 · पुस्तक पृ. 141, 142
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देखि रूप मुनि बिरति बिसारी। बड़ी बार लगि रहे निहारी।।
English explanation
AI draft: Seeing the maiden’s beauty, the sage Narada forgot his detachment and kept gazing at her for a long time.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| रूप | सुंदर रूप | beauty |
| मुनि | मुनि नारद | the sage Narada |
| बिरति | वैराग्य | detachment |
| बिसारी | भूल गए | forgot |
| बड़ी | बहुत लंबी | a long |
| बार | अवधि | time |
| लगि | तक | for |
| रहे | रहे | continued |
| निहारी | निहारते | gazing |
2 लच्छन तासु बिलोकि भुलाने। हृदयँ हरष नहिं प्रगट बखाने।।
English explanation
Seeing her auspicious marks, he lost himself in fascination; he did not openly express the joy in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लच्छन | शुभ लक्षण | auspicious marks |
| तासु | उसके | her |
| बिलोकि | देखकर | having observed |
| भुलाने | सुध-बुध भूल गए | lost himself in fascination |
| हृदयँ | हृदय में | in his heart |
| हरष | हर्ष | joy |
| नहिं | नहीं | not |
| प्रगट | खुलकर | openly |
| बखाने | बताया | expressed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.131
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 141
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 141, 142
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।