बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखनु सत्रुसूदनु एकरूपा। नख सिख ते सब अंग अनूपा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दलक्ष्मण और शत्रुघ्न दोनोंका एक रूप है। दोनोंके नखसे शिखातक सभी अङ्ग अनुपम हैं। मनको बड़े अच्छे लगते हैं, पर मुखसे उनका वर्णन नहीं हो सकता। उनकी उपमाके योग्य तीनों लोकोंमें कोई नहीं है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 292 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लखनु सत्रुसूदनु एकरूपा। नख सिख ते सब अंग अनूपा।।
मन भावहिं मुख बरनि न जाहीं। उपमा कहुँ त्रिभुवन कोउ नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.311 · पुस्तक पृ. 292, 292
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लखनु सत्रुसूदनु एकरूपा। नख सिख ते सब अंग अनूपा।।
English explanation
Lakshmana and Shatrughna look alike; from toenails to the crown of the head, all their limbs are incomparable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| सत्रुसूदनु | शत्रुघ्न, राम के भाई | Shatrughna, Rama’s brother |
| एकरूपा | एक-जैसे रूप वाले | alike in appearance |
| नख | नाखून | toenails |
| सिख | शिखा तक | to the crown of the head |
| ते | से | from |
| सब | सभी | all |
| अंग | अंग | limbs and features |
| अनूपा | अनुपम | incomparable |
2 मन भावहिं मुख बरनि न जाहीं। उपमा कहुँ त्रिभुवन कोउ नाहीं।।
English explanation
They delight the heart, yet words cannot describe them; in the three worlds there is no one to compare with them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन को | to the heart |
| भावहिं | प्रिय लगते हैं | are pleasing |
| मुख | मुख से | in speech |
| बरनि | वर्णित किए | be described |
| न | नहीं | not |
| जाहीं | जा सकते | can be |
| उपमा | तुलना | comparison |
| कहुँ | के लिए | for |
| त्रिभुवन | तीनों लोकों में | in the three worlds |
| कोउ | कोई | anyone |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.311
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 292
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 292, 292
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।