बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहा एक मैं आजु निहारे। जनु बिरंचि निज हाथ सँवारे।।
मूल पाठ
कहा एक मैं आजु निहारे। जनु बिरंचि निज हाथ सँवारे।।
भरतु रामही की अनुहारी। सहसा लखि न सकहिं नर नारी।।
स्रोत अभिलेख 1.311 · पुस्तक पृ. 292, 292
भावार्थ
मूल पाठ के बादएकने कहा—मैंने आज ही उन्हें देखा है; इतने सुन्दर हैं, मानो ब्रह्माजीने उन्हें अपने हाथों सँवारा है। भरत तो श्रीरामचन्द्रजीकी ही शकल-सूरतके हैं। स्त्री-पुरुष उन्हें सहसा पहचान नहीं सकते॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 292 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहा एक मैं आजु निहारे। जनु बिरंचि निज हाथ सँवारे।।
English explanation
One friend said, ‘I saw them today; it was as though Brahma had fashioned them with his own hands.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहा | कहा | said |
| एक | एक सखी ने | one friend |
| मैं | मैंने | I |
| आजु | आज | today |
| निहारे | उन्हें देखा | saw them |
| जनु | मानो | as though |
| बिरंचि | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने | Brahma, the creator |
| निज | अपने | his own |
| हाथ | हाथों से | with hands |
| सँवारे | सँवारा हो | had beautifully fashioned them |
2 भरतु रामही की अनुहारी। सहसा लखि न सकहिं नर नारी।।
English explanation
Bharata looks just like Rama; men and women cannot distinguish the two at a glance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतु | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| रामही | राम ही | Rama himself |
| की | के रूप की | of the appearance of |
| अनुहारी | समान आकृति वाले | resembling in appearance |
| सहसा | एकाएक | at a glance |
| लखि | भेद पहचान | discern the difference |
| न | नहीं | not |
| सकहिं | सकते हैं | can |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.311
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 292
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 292, 292
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।