बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रीझत राम सनेह निसोतें। को जग मंद मलिनमति मोतें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजी तो विशुद्ध प्रेमसे ही रीझते हैं, पर जगत्में मुझसे बढ़कर मूर्ख और मलिनबुद्धि और कौन होगा?॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 50 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रीझत राम सनेह निसोतें। को जग मंद मलिनमति मोतें।।
स्रोत अभिलेख 1.28 · पुस्तक पृ. 49, 50
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रीझत राम सनेह निसोतें। को जग मंद मलिनमति मोतें।।
English explanation
Rama is pleased by pure, unalloyed love; who in the world is more dull and impure-minded than I?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रीझत | प्रसन्न होते हैं | is pleased |
| राम | भगवान राम | Rama |
| सनेह | प्रेम से | by love |
| निसोतें | शुद्ध और निष्कपट | pure and unalloyed |
| को | कौन | who |
| जग | संसार में | in the world |
| मंद | मंदबुद्धि | dull |
| मलिनमति | मलिन बुद्धिवाला | impure-minded |
| मोतें | मुझसे | than me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 50
- सहायक विषय
- श्रीरामगुण और श्रीरामचरितकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 49, 50
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।