बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रावन मरन मनुज कर जाचा। प्रभु बिधि बचनु कीन्ह चह साचा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दरावणने [ब्रह्माजीसे] अपनी मृत्यु मनुष्यके हाथसे माँगी थी। ब्रह्माजीके वचनोंको प्रभु सत्य करना चाहते हैं। मैं जो पास नहीं जाता हूँ तो बड़ा पछतावा रह जायगा। इस प्रकार शिवजी विचार करते थे, परन्तु कोई भी युक्ति ठीक नहीं बैठती थी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 70 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रावन मरन मनुज कर जाचा। प्रभु बिधि बचनु कीन्ह चह साचा।।
जौं नहिं जाउँ रहइ पछितावा। करत बिचारु न बनत बनावा।।
स्रोत अभिलेख 1.49 · पुस्तक पृ. 70, 71
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रावन मरन मनुज कर जाचा। प्रभु बिधि बचनु कीन्ह चह साचा।।
English explanation
AI draft: Ravana had asked for death at human hands; the Lord wished to make Brahma’s word come true.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रावन | रावण ने | Ravana, the demon king |
| मरन | मृत्यु | death |
| मनुज | मनुष्य | a human being |
| कर | के हाथों | at the hands of |
| जाचा | माँगी थी | had requested |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| बिधि | ब्रह्मा के | Brahma’s |
| बचनु | वचन को | word or promise |
| कीन्ह | करना | to make |
| चह | चाहते थे | wished |
| साचा | सत्य | true |
2 जौं नहिं जाउँ रहइ पछितावा। करत बिचारु न बनत बनावा।।
English explanation
Shiva thinks: If I do not go, regret will remain. Despite deliberation, no workable solution emerged.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| नहिं | नहीं | not |
| जाउँ | मैं जाऊँ | I go |
| रहइ | रह जाएगा | will remain |
| पछितावा | पछतावा | regret |
| करत | करते हुए | while doing |
| बिचारु | विचार | deliberation |
| न | नहीं | not |
| बनत | बन पा रहा था | was working out |
| बनावा | उपाय या व्यवस्था | a solution or arrangement |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.49
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 70
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 70, 71
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।