बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम सुप्रेमहि पोषत पानी। हरत सकल कलि कलुष गलानी।।
मूल पाठ
राम सुप्रेमहि पोषत पानी। हरत सकल कलि कलुष गलानी।।
भव श्रम सोषक तोषक तोषा। समन दुरित दुख दारिद दोषा।।
स्रोत अभिलेख 1.43 · पुस्तक पृ. 65, 66
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह जल श्रीरामचन्द्रजीके सुन्दर प्रेमको पुष्ट करता है, कलियुगके समस्त पापों और उनसे होनेवाली ग्लानिको हर लेता है। संसारके (जन्म-मृत्युरूप) श्रमको सोख लेता है, सन्तोषको भी सन्तुष्ट करता है और पाप, ताप, दरिद्रता और दोषोंको नष्ट कर देता है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 65 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम सुप्रेमहि पोषत पानी। हरत सकल कलि कलुष गलानी।।
English explanation
This water nourishes pure love for Rama and removes all the impurity and distress of the age of Kali.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम के प्रति | for Lord Rama |
| सुप्रेमहि | उत्तम, निर्मल प्रेम को | pure, noble love |
| पोषत | पुष्ट करता है | nourishes |
| पानी | जल | water |
| हरत | दूर करता है | removes |
| सकल | समस्त | all |
| कलि | कलियुग के | of the age of Kali |
| कलुष | पाप-मल; अशुद्धि | sinful impurity |
| गलानी | ग्लानि; संताप | distress; dejection |
2 भव श्रम सोषक तोषक तोषा। समन दुरित दुख दारिद दोषा।।
English explanation
It dispels the weariness of worldly existence, fosters contentment, and alleviates sin, suffering, poverty, and faults.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भव | संसार का | of worldly existence |
| श्रम | थकान; क्लांति | weariness |
| सोषक | सुखाने वाला; मिटाने वाला | drying up; dispelling |
| तोषक | पुष्ट करने वाला | nourishing; fostering |
| तोषा | संतोष को | contentment |
| समन | शमन करने वाला | alleviating |
| दुरित | पाप | sin |
| दुख | दुःख | suffering |
| दारिद | दरिद्रता | poverty |
| दोषा | दोषों को | faults |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.43
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 65
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 65, 66
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