बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आरति बिनय दीनता मोरी। लघुता ललित सुबारि न थोरी।।
मूल पाठ
आरति बिनय दीनता मोरी। लघुता ललित सुबारि न थोरी।।
अदभुत सलिल सुनत गुनकारी। आस पिआस मनोमल हारी।।
स्रोत अभिलेख 1.43 · पुस्तक पृ. 65, 66
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेरा आर्तभाव, विनय और दीनता इस सुन्दर और निर्मल जलका कम हलकापन नहीं है (अर्थात् अत्यन्त हलकापन है)। यह जल बड़ा ही अनोखा है, जो सुननेसे ही गुण करता है और आशारूपी प्यासको और मनके मैलको दूर कर देता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 65 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 आरति बिनय दीनता मोरी। लघुता ललित सुबारि न थोरी।।
English explanation
AI-generated interpretation draft: My anguished appeal, supplication, humility, and sense of smallness form the lovely, abundant water of this narrative.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आरति | आर्त पुकार; व्यथा | anguished appeal; distress |
| बिनय | विनय; नम्र प्रार्थना | humble supplication |
| दीनता | दीन भाव | humility and lowliness |
| मोरी | मेरी | my |
| लघुता | अपनी अल्पता का भाव | sense of one's smallness |
| ललित | सुंदर; मनोहर | lovely; graceful |
| सुबारि | उत्तम जल | fine water |
| न | नहीं | not |
| थोरी | थोड़ा; अल्प | little; scant |
2 अदभुत सलिल सुनत गुनकारी। आस पिआस मनोमल हारी।।
English explanation
This wondrous water benefits one merely through hearing; it removes the thirst of craving and the impurities of the mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अदभुत | अद्भुत | wondrous |
| सलिल | जल | water |
| सुनत | सुनते ही; सुनने पर | upon hearing |
| गुनकारी | हितकारी; लाभदायक | beneficial |
| आस | आशा; सांसारिक चाह | hope; worldly craving |
| पिआस | प्यास | thirst |
| मनोमल | मन का मैल | impurity of the mind |
| हारी | हरने वाला | removing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.43
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 65
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 65, 66
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।