बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
काम कोह मद मोह नसावन। बिमल बिबेक बिराग बढ़ावन।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह जल काम, क्रोध, मद और मोहका नाश करनेवाला और निर्मल ज्ञान और वैराग्यका बढ़ानेवाला है। इसमें आदरपूर्वक स्नान करनेसे और इसे पीनेसे हृदयमें रहनेवाले सब पाप-ताप मिट जाते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 65 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
काम कोह मद मोह नसावन। बिमल बिबेक बिराग बढ़ावन।।
सादर मज्जन पान किए तें। मिटहिं पाप परिताप हिए तें।।
स्रोत अभिलेख 1.43 · पुस्तक पृ. 65, 66
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 काम कोह मद मोह नसावन। बिमल बिबेक बिराग बढ़ावन।।
English explanation
It destroys lust, anger, arrogance, and delusion, and increases clear discernment and detachment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काम | कामना; वासना | desire; lust |
| कोह | क्रोध | anger |
| मद | अहंकार; मद | arrogance; pride |
| मोह | मोह; भ्रमपूर्ण आसक्ति | delusion; attachment |
| नसावन | नष्ट करने वाला | destroying |
| बिमल | निर्मल | pure; unclouded |
| बिबेक | विवेक; उचित-अनुचित का बोध | discernment |
| बिराग | वैराग्य; अनासक्ति | detachment |
| बढ़ावन | बढ़ाने वाला | increasing |
2 सादर मज्जन पान किए तें। मिटहिं पाप परिताप हिए तें।।
English explanation
By reverently bathing in and drinking this water, sin and anguish disappear from the heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदर और श्रद्धा से | with reverence |
| मज्जन | स्नान | bathing |
| पान | पीना | drinking |
| किए | करने | performing |
| तें | से; करने के कारण | by; as a result of |
| मिटहिं | मिट जाते हैं | disappear |
| पाप | पाप | sins |
| परिताप | संताप; गहरा दुःख | anguish |
| हिए | हृदय | the heart |
| तें | से | from |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.43
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 65
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 65, 66
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।