बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जिन्ह एहि बारि न मानस धोए। ते कायर कलिकाल बिगोए।।
मूल पाठ
जिन्ह एहि बारि न मानस धोए। ते कायर कलिकाल बिगोए।।
तृषित निरखि रबि कर भव बारी। फिरिहहि मृग जिमि जीव दुखारी।।
स्रोत अभिलेख 1.43 · पुस्तक पृ. 65, 66
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिन्होंने इस (राम-सुयशरूपी) जलसे अपने हृदयको नहीं धोया, वे कायर कलिकालके द्वारा ठगे गये। जैसे प्यासा हिरन सूर्यकी किरणोंके रेतपर पडऩेसे उत्पन्न हुए जलके भ्रमको वास्तविक जल समझकर पीनेको दौड़ता है और जल न पाकर दुखी होता है, वैसे ही वे (कलियुगसे ठगे हुए) जीव भी [विषयोंके पीछे भटककर] दु:खी होंगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 66 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जिन्ह एहि बारि न मानस धोए। ते कायर कलिकाल बिगोए।।
English explanation
Those who have not washed their minds with this water are the fainthearted, corrupted by the age of Kali.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्ह | जिन्होंने | those who |
| एहि | इस | this |
| बारि | जल से | with water |
| न | नहीं | not |
| मानस | मन | mind |
| धोए | धोया; शुद्ध किया | washed; purified |
| ते | वे | they |
| कायर | कायर; साहसहीन | fainthearted |
| कलिकाल | कलियुग द्वारा | by the age of Kali |
| बिगोए | बिगाड़े गए | corrupted; ruined |
2 तृषित निरखि रबि कर भव बारी। फिरिहहि मृग जिमि जीव दुखारी।।
English explanation
Those suffering beings will wander like thirsty deer, seeing the mirage-water of worldly existence formed by the sun's rays.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तृषित | प्यासे | thirsty |
| निरखि | देखकर | seeing |
| रबि | सूर्य | the sun |
| कर | किरणें | rays |
| भव | संसार-रूपी | representing worldly existence |
| बारी | जल; मृगतृष्णा का जल | water; mirage-water |
| फिरिहहि | भटकते फिरेंगे | will wander |
| मृग | हिरण | deer |
| जिमि | जैसे | like |
| जीव | जीव; प्राणी | living beings |
| दुखारी | दुःखी | suffering |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.43
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 66
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 65, 66
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।