बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम रमापति कर धनु लेहू। खैंचहु मिटै मोर संदेहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[परशुरामजीने कहा—] हे राम! हे लक्ष्मीपति ! धनुषको हाथमें [अथवा लक्ष्मीपति विष्णुका धनुष] लीजिये और इसे खींचिये, जिससे मेरा सन्देह मिट जाय। परशुरामजी धनुष देने लगे, तब वह आप ही चला गया। तब परशुरामजीके मनमें बड़ा आश्चर्य हुआ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 271 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम रमापति कर धनु लेहू। खैंचहु मिटै मोर संदेहू।।
देत चापु आपुहिं चलि गयऊ। परसुराम मन बिसमय भयऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.284 · पुस्तक पृ. 270, 271
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम रमापति कर धनु लेहू। खैंचहु मिटै मोर संदेहू।।
English explanation
Rama, take the bow of Vishnu, Lakshmi’s consort, and draw it so that my doubt may be dispelled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | हे राम | O Rama |
| रमापति | लक्ष्मी के पति विष्णु | Vishnu, Lakshmi’s consort |
| कर | का | of |
| धनु | धनुष | bow |
| लेहू | लीजिए | take |
| खैंचहु | खींचिए | draw it |
| मिटै | मिट जाए | may be dispelled |
| मोर | मेरा | my |
| संदेहू | संदेह | doubt |
2 देत चापु आपुहिं चलि गयऊ। परसुराम मन बिसमय भयऊ।।
English explanation
As it was being offered, the bow passed to Rama of its own accord; Parashurama was filled with wonder.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देत | देते समय; देते ही | as it was being given |
| चापु | धनुष | the bow |
| आपुहिं | अपने-आप ही | of its own accord |
| चलि | चलकर | moving; passing |
| गयऊ | चला गया | went |
| परसुराम | परशुराम के | of Parashurama |
| मन | मन में | in the mind |
| बिसमय | आश्चर्य | wonder |
| भयऊ | हुआ | arose |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.284
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 271
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 270, 271
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।