बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिप्रबंस कै असि प्रभुताई। अभय होइ जो तुम्हहि डेराई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दब्राह्मणवंशकी ऐसी ही प्रभुता (महिमा) है कि जो आपसे डरता है, वह सबसे निर्भय हो जाता है [अथवा जो भयरहित होता है वह भी आपसे डरता है]। श्रीरघुनाथजीके कोमल और रहस्यपूर्ण वचन सुनकर परशुरामजीकी बुद्धिके परदे खुल गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 271 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिप्रबंस कै असि प्रभुताई। अभय होइ जो तुम्हहि डेराई।।
सुनु मृदु गूढ़ बचन रघुपति के। उघरे पटल परसुधर मति के।।
स्रोत अभिलेख 1.284 · पुस्तक पृ. 270, 271
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिप्रबंस कै असि प्रभुताई। अभय होइ जो तुम्हहि डेराई।।
English explanation
Such is the greatness of the Brahmin lineage that whoever fears you becomes free from fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्रबंस | ब्राह्मण वंश | the Brahmin lineage |
| कै | की | of |
| असि | ऐसी | such |
| प्रभुताई | महिमा; प्रताप | greatness; power |
| अभय | निर्भय | free from fear |
| होइ | हो जाता है | becomes |
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| तुम्हहि | आपसे | of you |
| डेराई | डरता है | is afraid |
2 सुनु मृदु गूढ़ बचन रघुपति के। उघरे पटल परसुधर मति के।।
English explanation
On hearing Rama’s gentle, profound words, the veils over Parashurama’s understanding were lifted.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनकर | on hearing |
| मृदु | कोमल | gentle |
| गूढ़ | गहरे अर्थ वाले | profound in meaning |
| बचन | वचन | words |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| के | के | of |
| उघरे | खुल गए; हट गए | were opened; lifted |
| पटल | आवरण | veils |
| परसुधर | परशु धारण करने वाले परशुराम | Parashurama, the axe-bearer |
| मति | बुद्धि | understanding |
| के | के | over; of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.284
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 271
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 270, 271
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।