बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
छत्रिय तनु धरि समर सकाना। कुल कलंकु तेहिं पावँर आना।।
मूल पाठ
छत्रिय तनु धरि समर सकाना। कुल कलंकु तेहिं पावँर आना।।
कहउँ सुभाउ न कुलहि प्रसंसी। कालहु डरहिं न रन रघुबंसी।।
स्रोत अभिलेख 1.284 · पुस्तक पृ. 270, 271
भावार्थ
मूल पाठ के बादक्षत्रियका शरीर धरकर जो युद्धमें डर गया, उस नीचने अपने कुलपर कलङ्क लगा दिया। मैं स्वभावसे ही कहता हूँ, कुलकी प्रशंसा करके नहीं, कि रघुवंशी रणमें कालसे भी नहीं डरते॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 271 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 छत्रिय तनु धरि समर सकाना। कुल कलंकु तेहिं पावँर आना।।
English explanation
The base person who, having taken birth as a warrior, fears battle brings disgrace upon his lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छत्रिय | क्षत्रिय; योद्धा-वर्ण का | of the warrior class |
| तनु | शरीर | body |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| समर | युद्ध में | in battle |
| सकाना | डरा; सकुचाया | became afraid; shrank back |
| कुल | कुल पर | upon the lineage |
| कलंकु | कलंक | disgrace |
| तेहिं | उसने | that person |
| पावँर | नीच व्यक्ति ने | the base person |
| आना | लाया | brought |
2 कहउँ सुभाउ न कुलहि प्रसंसी। कालहु डरहिं न रन रघुबंसी।।
English explanation
I am stating my nature, not praising my lineage: descendants of Raghu do not fear even Death in battle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| सुभाउ | स्वभाव | natural disposition |
| न | नहीं | not |
| कुलहि | कुल की | of the lineage |
| प्रसंसी | प्रशंसा करता हूँ | am praising |
| कालहु | काल से भी | even Death |
| डरहिं | डरते हैं | fear |
| न | नहीं | not |
| रन | युद्ध में | in battle |
| रघुबंसी | रघु के वंशज | descendants of Raghu |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.284
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 271
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 270, 271
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।