बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम भालु कपि कटकु बटोरा। सेतु हेतु श्रमु कीन्ह न थोरा।।
मूल पाठ
राम भालु कपि कटकु बटोरा। सेतु हेतु श्रमु कीन्ह न थोरा।।
नामु लेत भवसिंधु सुखाहीं। करहु बिचारु सुजन मन माहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.25 · पुस्तक पृ. 46, 47
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीने तो भालू और बन्दरोंकी सेना बटोरी और समुद्रपर पुल बाँधनेके लिये थोड़ा परिश्रम नहीं किया; परंतु नाम लेते ही संसार-समुद्र सूख जाता है। सज्जनगण! मनमें विचार कीजिये [कि दोनोंमें कौन बड़ा है]॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 46 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राम भालु कपि कटकु बटोरा। सेतु हेतु श्रमु कीन्ह न थोरा।।
English explanation
Rama assembled an army of bears and monkeys and undertook no small labor to build the bridge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम ने | Rama |
| भालु | भालुओं की | of bears |
| कपि | वानरों की | of monkeys |
| कटकु | सेना | army |
| बटोरा | इकट्ठी की | assembled |
| सेतु | पुल बनाने | building the bridge |
| हेतु | के लिए | for |
| श्रमु | परिश्रम | labor |
| कीन्ह | किया | undertook |
| न | नहीं | not |
| थोरा | थोड़ा | little |
2 नामु लेत भवसिंधु सुखाहीं। करहु बिचारु सुजन मन माहीं।।
English explanation
At the utterance of Rama’s name, the ocean of worldly existence dries up. Good people, ponder this in your hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नामु | राम का नाम | Rama’s name |
| लेत | लेते ही | upon uttering |
| भवसिंधु | संसाररूपी समुद्र | the ocean of worldly existence |
| सुखाहीं | सूख जाता है | dries up |
| करहु | करो | do |
| बिचारु | विचार | reflection |
| सुजन | हे सज्जनो | O good people |
| मन | मन | the heart |
| माहीं | के भीतर | within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.25
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 46
- सहायक विषय
- श्रीनाम-वन्दना और नाम-महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 46, 47
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।