बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम भगति भूषित जियँ जानी। सुनिहहिं सुजन सराहि सुबानी।।
मूल पाठ
राम भगति भूषित जियँ जानी। सुनिहहिं सुजन सराहि सुबानी।।
कबि न होउँ नहिं बचन प्रबीनू। सकल कला सब बिद्या हीनू।।
स्रोत अभिलेख 1.9 · पुस्तक पृ. 29, 30
भावार्थ
मूल पाठ के बादसज्जनगण इस कथाको अपने जीमें श्रीरामजीकी भक्तिसे भूषित जानकर सुन्दर वाणीसे सराहना करते हुए सुनेंगे। मैं न तो कवि हूँ, न वाक्यरचनामें ही कुशल हूँ, मैं तो सब कलाओं तथा सब विद्याओंसे रहित हूँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 29 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम भगति भूषित जियँ जानी। सुनिहहिं सुजन सराहि सुबानी।।
English explanation
Recognizing in their hearts that it is adorned with devotion to Rama, good people will listen, praising it in gracious words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम की | to Lord Rama |
| भगति | भक्ति से | with devotion |
| भूषित | सुशोभित | adorned |
| जियँ | हृदय में | in the heart |
| जानी | जानकर | recognizing |
| सुनिहहिं | सुनेंगे | will listen |
| सुजन | सज्जन | good people |
| सराहि | सराहते हुए | praising |
| सुबानी | सुंदर वाणी से | in gracious words |
2 कबि न होउँ नहिं बचन प्रबीनू। सकल कला सब बिद्या हीनू।।
English explanation
I am neither a poet nor skilled in expression; I lack all arts and every branch of learning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबि | कवि | a poet |
| न | नहीं | not |
| होउँ | मैं हूँ | I am |
| नहिं | न ही | nor |
| बचन | वाणी में | in expression |
| प्रबीनू | निपुण | skilled |
| सकल | समस्त | all |
| कला | कलाओं से | arts |
| सब | सभी | every |
| बिद्या | विद्याओं से | branch of learning |
| हीनू | रहित हूँ | I am devoid of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 29
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 29, 30
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।