बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु पद प्रीति न सामुझि नीकी। तिन्हहि कथा सुनि लागहि फीकी।।
मूल पाठ
प्रभु पद प्रीति न सामुझि नीकी। तिन्हहि कथा सुनि लागहि फीकी।।
हरि हर पद रति मति न कुतरकी। तिन्ह कहुँ मधुर कथा रघुवर की।।
स्रोत अभिलेख 1.9 · पुस्तक पृ. 29, 30
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिन्हें न तो प्रभुके चरणोंमें प्रेम है और न अच्छी समझ ही है, उनको यह कथा सुननेमें फीकी लगेगी। जिनकी श्रीहरि (भगवान् विष्णु) और श्रीहर (भगवान् शिव) के चरणोंमें प्रीति है और जिनकी बुद्धि कुतर्क करनेवाली नहीं है [जो श्रीहरि-हरमें भेदकी या ऊँच-नीचकी कल्पना नहीं करते], उन्हें श्रीरघुनाथजीकी यह कथा मीठी लगेगी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 29 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रभु पद प्रीति न सामुझि नीकी। तिन्हहि कथा सुनि लागहि फीकी।।
English explanation
Those who lack love for the Lord’s feet and sound understanding find this story insipid when they hear it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| पद | चरणों में | at the feet |
| प्रीति | प्रेम | love |
| न | नहीं है | lack |
| सामुझि | समझ | understanding |
| नीकी | अच्छी | sound |
| तिन्हहि | उन्हीं को | to those very people |
| कथा | कथा | the story |
| सुनि | सुनकर | upon hearing |
| लागहि | लगती है | seems |
| फीकी | नीरस | insipid |
2 हरि हर पद रति मति न कुतरकी। तिन्ह कहुँ मधुर कथा रघुवर की।।
English explanation
To those who love the feet of Vishnu and Shiva and whose minds are not given to specious reasoning, the story of Rama, foremost of Raghu’s lineage, is sweet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरि | भगवान विष्णु | Lord Vishnu |
| हर | भगवान शिव | Lord Shiva |
| पद | चरणों में | at the feet |
| रति | प्रेम | love |
| मति | बुद्धि | mind |
| न | नहीं | not |
| कुतरकी | कुतर्क करने वाली | given to specious reasoning |
| तिन्ह | उन लोगों | those people |
| कहुँ | के लिए | for |
| मधुर | मधुर | sweet |
| कथा | कथा | story |
| रघुवर | रघुकुल के श्रेष्ठ राम | Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| की | की | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 29
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 29, 30
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।