बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कबित रसिक न राम पद नेहू। तिन्ह कहँ सुखद हास रस एहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो न तो कविताके रसिक हैं और न जिनका श्रीरामचन्द्रजीके चरणोंमें प्रेम है, उनके लिये भी यह कविता सुखद हास्यरसका काम देगी। प्रथम तो यह भाषाकी रचना है, दूसरे मेरी बुद्धि भोली है; इससे यह हँसनेके योग्य ही है, हँसनेमें उन्हें कोई दोष नहीं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 29 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कबित रसिक न राम पद नेहू। तिन्ह कहँ सुखद हास रस एहू।।
भाषा भनिति भोरि मति मोरी। हँसिबे जोग हँसें नहिं खोरी।।
स्रोत अभिलेख 1.9 · पुस्तक पृ. 29, 30
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कबित रसिक न राम पद नेहू। तिन्ह कहँ सुखद हास रस एहू।।
English explanation
For those who neither appreciate poetry nor love Rama’s feet, this offers the pleasure of comic sentiment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबित | काव्य के | of poetry |
| रसिक | रस के पारखी | appreciators |
| न | न; न ही | neither; nor |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| पद | चरणों में | at the feet |
| नेहू | प्रेम | love |
| तिन्ह | उन लोगों | those people |
| कहँ | के लिए | for |
| सुखद | सुख देने वाला | pleasurable |
| हास | हास्य का | comic |
| रस | रस | aesthetic sentiment |
| एहू | यह | this |
2 भाषा भनिति भोरि मति मोरी। हँसिबे जोग हँसें नहिं खोरी।।
English explanation
My composition is in the vernacular, and my understanding is simple; it deserves laughter, so those who laugh are not at fault.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाषा | लोकभाषा में | in the vernacular |
| भनिति | काव्य-रचना | poetic composition |
| भोरि | भोली; सरल | naive; simple |
| मति | बुद्धि | understanding |
| मोरी | मेरी | my |
| हँसिबे | हँसने के | to be laughed at |
| जोग | योग्य | worthy |
| हँसें | यदि हँसें | if they laugh |
| नहिं | नहीं है | there is no |
| खोरी | दोष | fault |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 29
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 29, 30
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।