बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम देखावहिं अनुजहि रचना। कहि मृदु मधुर मनोहर बचना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकोमल, मधुर और मनोहर वचन कहकर श्रीरामजी अपने छोटे भाई लक्ष्मणको [यज्ञभूमिकी] रचना दिखलाते हैं। जिनकी आज्ञा पाकर माया लव निमेष (पलक गिरनेके चौथाई समय) में ब्रह्माण्डोंके समूह रच डालती है,॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 221 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम देखावहिं अनुजहि रचना। कहि मृदु मधुर मनोहर बचना।।
लव निमेष महँ भुवन निकाया। रचइ जासु अनुसासन माया।।
स्रोत अभिलेख 1.225 · पुस्तक पृ. 221, 222
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम देखावहिं अनुजहि रचना। कहि मृदु मधुर मनोहर बचना।।
English explanation
Speaking gentle, sweet, and charming words, Rama shows the arrangement there to his younger brother Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम | Rama |
| देखावहिं | दिखाते हैं | shows |
| अनुजहि | छोटे भाई लक्ष्मण को | to his younger brother Lakshmana |
| रचना | निर्माण और व्यवस्था | construction and arrangement |
| कहि | कहकर | saying |
| मृदु | कोमल | gentle |
| मधुर | मीठे | sweet |
| मनोहर | मन को मोहने वाले | charming |
| बचना | वचन | words |
2 लव निमेष महँ भुवन निकाया। रचइ जासु अनुसासन माया।।
English explanation
He under whose command Maya creates multitudes of worlds in the briefest instant—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लव | अत्यंत छोटा कालांश | a minute unit of time |
| निमेष | पलक झपकने जितना समय | the time of a blink |
| महँ | में | within |
| भुवन | लोकों का | of worlds |
| निकाया | समूह | multitude |
| रचइ | रचती है | creates |
| जासु | जिनके | whose |
| अनुसासन | आदेश से | under the command |
| माया | माया, सृष्टि रचने वाली शक्ति | Maya, the power that creates the world |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.225
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 221
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 221, 222
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।