बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भगति हेतु सोइ दीनदयाला। चितवत चकित धनुष मखसाला।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवही दीनोंपर दया करनेवाले श्रीरामजी भक्तिके कारण धनुषयज्ञशालाको चकित होकर (आश्चर्यके साथ) देख रहे हैं। इस प्रकार सब कौतुक (विचित्र रचना) देखकर वे गुरुके पास चले। देर हुई जानकर उनके मनमें डर है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 221 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भगति हेतु सोइ दीनदयाला। चितवत चकित धनुष मखसाला।।
कौतुक देखि चले गुरु पाहीं। जानि बिलंबु त्रास मन माहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.225 · पुस्तक पृ. 221, 222
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भगति हेतु सोइ दीनदयाला। चितवत चकित धनुष मखसाला।।
English explanation
That same Rama, compassionate to the lowly, gazes in wonder at the bow-sacrifice pavilion for the sake of devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगति | भक्ति | devotion |
| हेतु | के लिए | for the sake of |
| सोइ | वही | that very one |
| दीनदयाला | दीनों पर दया करने वाले राम | Rama, compassionate to the lowly |
| चितवत | देखते हैं | gazes at |
| चकित | आश्चर्यचकित होकर | in wonder |
| धनुष | धनुष-संबंधी | of the bow |
| मखसाला | यज्ञ की शाला | sacrificial pavilion |
2 कौतुक देखि चले गुरु पाहीं। जानि बिलंबु त्रास मन माहीं।।
English explanation
After seeing the spectacle, the two brothers set off toward their teacher, feeling apprehensive because they realized they had stayed late.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौतुक | कौतूहलपूर्ण दृश्य | spectacle |
| देखि | देखकर | having seen |
| चले | चल पड़े | set off |
| गुरु | गुरु विश्वामित्र के | their teacher Vishvamitra |
| पाहीं | पास | toward; near |
| जानि | जानकर | realizing |
| बिलंबु | देर हो जाना | the delay |
| त्रास | भय | apprehension |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.225
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 221
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणका जनकपुर-निरीक्षण
- मुद्रित पृष्ठ
- 221, 222
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।