बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम चरित सर बिनु अन्हवाएँ। सो श्रम जाइ न कोटि उपाएँ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसरस्वतीजीकी दौड़ी आनेकी वह थकावट रामचरितरूपी सरोवरमें उन्हें नहलाये बिना दूसरे करोड़ों उपायोंसे भी दूर नहीं होती। कवि और पण्डित अपने हृदयमें ऐसा विचारकर कलियुगके पापोंको हरनेवाले श्रीहरिके यशका ही गान करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 32 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम चरित सर बिनु अन्हवाएँ। सो श्रम जाइ न कोटि उपाएँ।।
कबि कोबिद अस हृदयँ बिचारी। गावहिं हरि जस कलि मल हारी।।
स्रोत अभिलेख 1.11 · पुस्तक पृ. 32, 32
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम चरित सर बिनु अन्हवाएँ। सो श्रम जाइ न कोटि उपाएँ।।
English explanation
Unless she is bathed in the lake of Rama’s deeds, that weariness of hers does not depart, even through countless remedies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम के | of Rama |
| चरित | चरित्र; लीलाएँ | deeds; life story |
| सर | सरोवर में | in the lake |
| बिनु | बिना | without |
| अन्हवाएँ | स्नान कराए | having her bathed |
| सो | वह | that |
| श्रम | थकान; श्रम | weariness; exertion |
| जाइ | दूर होता है | departs |
| न | नहीं | not |
| कोटि | करोड़ों | tens of millions of; countless |
| उपाएँ | उपायों से | through remedies |
2 कबि कोबिद अस हृदयँ बिचारी। गावहिं हरि जस कलि मल हारी।।
English explanation
Reflecting thus in their hearts, poets and scholars sing Hari’s glory, which removes the impurities of the age of Kali.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबि | कवि | poets |
| कोबिद | विद्वान; जानकार | scholars; the knowledgeable |
| अस | ऐसा | thus |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| बिचारी | विचार करके | having reflected |
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| हरि | हरि; भगवान विष्णु के | of Hari, Lord Vishnu |
| जस | यश; महिमा | glory |
| कलि | कलियुग का | of the age of Kali |
| मल | मल; पापरूपी अशुद्धि | impurity; sinful taint |
| हारी | दूर करने वाला | removing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 32
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 32, 32
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।