बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तैसेहिं सुकबि कबित बुध कहहीं। उपजहिं अनत अनत छबि लहहीं।।
मूल पाठ
तैसेहिं सुकबि कबित बुध कहहीं। उपजहिं अनत अनत छबि लहहीं।।
भगति हेतु बिधि भवन बिहाई। सुमिरत सारद आवति धाई।।
स्रोत अभिलेख 1.11 · पुस्तक पृ. 32, 32
भावार्थ
मूल पाठ के बादइसी तरह, बुद्धिमान् लोग कहते हैं कि सुकविकी कविता भी उत्पन्न और कहीं होती है और शोभा अन्यत्र कहीं पाती है (अर्थात् कविकी वाणीसे उत्पन्न हुई कविता वहाँ शोभा पाती है जहाँ उसका विचार, प्रचार तथा उसमें कथित आदर्शका ग्रहण और अनुसरण होता है)। कविके स्मरण करते ही उसकी भक्तिके कारण सरस्वतीजी ब्रह्मलोकको छोड़कर दौड़ी आती हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 32 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तैसेहिं सुकबि कबित बुध कहहीं। उपजहिं अनत अनत छबि लहहीं।।
English explanation
Likewise, the learned say that good poets’ compositions arise in one place and gain beauty in another.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तैसेहिं | ठीक उसी प्रकार | in just the same way |
| सुकबि | अच्छे कवियों की | of good poets |
| कबित | कविताएँ | poems |
| बुध | विद्वान लोग | the learned |
| कहहीं | कहते हैं | say |
| उपजहिं | उत्पन्न होती हैं | arise |
| अनत | एक स्थान पर | in one place |
| अनत | दूसरे स्थान पर | in another place |
| छबि | शोभा; सुंदरता की प्रतिष्ठा | beauty; appreciation |
| लहहीं | प्राप्त करती हैं | gain |
2 भगति हेतु बिधि भवन बिहाई। सुमिरत सारद आवति धाई।।
English explanation
For devotion’s sake, Saraswati leaves Brahma’s abode and comes running when remembered.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगति | भक्ति | devotion |
| हेतु | के कारण; के लिए | for the sake of |
| बिधि | ब्रह्मा का | Brahma’s |
| भवन | भवन; निवास | abode |
| बिहाई | छोड़कर | leaving |
| सुमिरत | स्मरण करते ही | upon being remembered |
| सारद | सरस्वती; वाणी की देवी | Saraswati, goddess of speech |
| आवति | आती हैं | comes |
| धाई | दौड़कर | running |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 32
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 32, 32
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