बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मनि मानिक मुकुता छबि जैसी। अहि गिरि गज सिर सोह न तैसी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमणि, माणिक और मोतीकी जैसी सुन्दर छबि है, वह साँप, पर्वत और हाथीके मस्तकपर वैसी शोभा नहीं पाती। राजाके मुकुट और नवयुवती स्त्रीके शरीरको पाकर ही ये सब अधिक शोभाको प्राप्त होते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 32 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मनि मानिक मुकुता छबि जैसी। अहि गिरि गज सिर सोह न तैसी।।
नृप किरीट तरुनी तनु पाई। लहहिं सकल सोभा अधिकाई।।
स्रोत अभिलेख 1.11 · पुस्तक पृ. 32, 32
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मनि मानिक मुकुता छबि जैसी। अहि गिरि गज सिर सोह न तैसी।।
English explanation
AI draft: Gems, rubies, and pearls do not display their beauty to the same extent on serpents, mountains, and elephants’ heads.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनि | मणि; बहुमूल्य रत्न | gem; precious stone |
| मानिक | माणिक; लाल रत्न | ruby |
| मुकुता | मोती | pearls |
| छबि | शोभा | beauty |
| जैसी | जिस प्रकार की | such as |
| अहि | सर्प | serpent |
| गिरि | पर्वत | mountain |
| गज | हाथी | elephant |
| सिर | सिर पर | on the head |
| सोह | शोभित होते हैं | look beautiful |
| न | नहीं | not |
| तैसी | उसी प्रकार की | to that same extent |
2 नृप किरीट तरुनी तनु पाई। लहहिं सकल सोभा अधिकाई।।
English explanation
Placed on a king’s crown or a young woman’s body, all these gems gain greater beauty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृप | राजा का | a king’s |
| किरीट | मुकुट | crown |
| तरुनी | युवती का | a young woman’s |
| तनु | शरीर | body |
| पाई | पाकर | having found a place on |
| लहहिं | प्राप्त करते हैं | gain |
| सकल | सभी रत्न | all the gems |
| सोभा | शोभा | beauty |
| अधिकाई | अधिक; बढ़ी हुई | greater; increased |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 32
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 32, 32
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।