बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम अनुज मन की गति जानी। भगत बछलता हिंयँ हुलसानी।।
मूल पाठ
राम अनुज मन की गति जानी। भगत बछलता हिंयँ हुलसानी।।
परम बिनीत सकुचि मुसुकाई। बोले गुर अनुसासन पाई।।
स्रोत अभिलेख 1.218 · पुस्तक पृ. 215, 216
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[अन्तर्यामी] श्रीरामचन्द्रजीने छोटे भाईके मनकी दशा जान ली, [तब] उनके हृदयमें भक्तवत्सलता उमड़ आयी। वे गुरुकी आज्ञा पाकर बहुत ही विनयके साथ सकुचाते हुए मुसकराकर बोले—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 215 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम अनुज मन की गति जानी। भगत बछलता हिंयँ हुलसानी।।
English explanation
Rama understood his younger brother’s wish, and tender affection for his devotees welled up in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम ने | Rama |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण के | of his younger brother Lakshmana |
| मन | मन | mind |
| की | की | of |
| गति | दशा या इच्छा | state or wish |
| जानी | जान ली | understood |
| भगत | भक्तों के प्रति | toward devotees |
| बछलता | स्नेह-वात्सल्य | tender affection |
| हिंयँ | हृदय में | in the heart |
| हुलसानी | उमड़ उठा | welled up |
2 परम बिनीत सकुचि मुसुकाई। बोले गुर अनुसासन पाई।।
English explanation
With great humility, Rama smiled diffidently and spoke after receiving his teacher’s permission.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परम | अत्यंत | extremely |
| बिनीत | विनम्र | humble |
| सकुचि | संकोच करके | with diffidence |
| मुसुकाई | मुसकराकर | having smiled |
| बोले | बोले | spoke |
| गुर | गुरु विश्वामित्र की | of his teacher Vishvamitra |
| अनुसासन | आज्ञा या अनुमति | direction or permission |
| पाई | पाकर | having received |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.218
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 215
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणको देखकर जनकजीकी प्रेम-मुग्धता
- मुद्रित पृष्ठ
- 215, 216
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।