बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राममगत तुम्ह मन क्रम बानी। चतुराई तुम्हारी मैं जानी।।
मूल पाठ
राममगत तुम्ह मन क्रम बानी। चतुराई तुम्हारी मैं जानी।।
चाहहु सुनै राम गुन गूढ़ा। कीन्हिहु प्रस्न मनहुँ अति मूढ़ा।।
स्रोत अभिलेख 1.47 · पुस्तक पृ. 69, 69
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुम मन, वचन और कर्मसे श्रीरामजीके भक्त हो। तुम्हारी चतुराईको मैं जान गया। तुम श्रीरामजीके रहस्यमय गुणोंको सुनना चाहते हो; इसीसे तुमने ऐसा प्रश्न किया है मानो बड़े ही मूढ़ हो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 69 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 राममगत तुम्ह मन क्रम बानी। चतुराई तुम्हारी मैं जानी।।
English explanation
You are devoted to Rama in thought, deed, and speech; I have understood your cleverness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राममगत | राम के भक्त | a devotee of Rama |
| तुम्ह | आप | you |
| मन | मन से | in thought |
| क्रम | कर्म से | in deed |
| बानी | वाणी से | in speech |
| चतुराई | चतुराई; युक्ति | cleverness; stratagem |
| तुम्हारी | आपकी | your |
| मैं | मैंने | I |
| जानी | समझ ली | have understood |
2 चाहहु सुनै राम गुन गूढ़ा। कीन्हिहु प्रस्न मनहुँ अति मूढ़ा।।
English explanation
You wish to hear Rama’s profound qualities; you have posed your question as though you were utterly ignorant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चाहहु | आप चाहते हैं | you wish |
| सुनै | सुनना | to hear |
| राम | राम के | of Rama |
| गुन | गुण | qualities |
| गूढ़ा | गूढ़; गहरे | profound; subtle |
| कीन्हिहु | आपने किया | you made; you posed |
| प्रस्न | प्रश्न | a question |
| मनहुँ | मानो | as though |
| अति | अत्यंत | extremely |
| मूढ़ा | अज्ञानी | ignorant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.47
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 69
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 69, 69
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।