बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जैसे मिटै मोर भ्रम भारी। कहहु सो कथा नाथ बिस्तारी।।
मूल पाठ
जैसे मिटै मोर भ्रम भारी। कहहु सो कथा नाथ बिस्तारी।।
जागबलिक बोले मुसुकाई। तुम्हहि बिदित रघुपति प्रभुताई।।
स्रोत अभिलेख 1.47 · पुस्तक पृ. 69, 69
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! जिस प्रकारसे मेरा यह भारी भ्रम मिट जाय, आप वही कथा विस्तारपूर्वक कहिये। इसपर याज्ञवल्क्यजी मुसकराकर बोले, श्रीरघुनाथजीकी प्रभुताको तुम जानते हो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 69 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जैसे मिटै मोर भ्रम भारी। कहहु सो कथा नाथ बिस्तारी।।
English explanation
O master, tell that story in detail so that my deep confusion may be dispelled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जैसे | जिस प्रकार; जिससे | in such a way that |
| मिटै | मिट जाए | may be dispelled |
| मोर | मेरा | my |
| भ्रम | भ्रम; संशय | confusion; doubt |
| भारी | गहरा; बड़ा | deep; great |
| कहहु | आप कहिए | please tell |
| सो | वह | that |
| कथा | कथा | story |
| नाथ | हे स्वामी | O master |
| बिस्तारी | विस्तार से | in detail |
2 जागबलिक बोले मुसुकाई। तुम्हहि बिदित रघुपति प्रभुताई।।
English explanation
Sage Yajnavalkya smiled and said: You know the sovereign greatness of Rama, lord of the Raghu lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जागबलिक | ऋषि याज्ञवल्क्य | sage Yajnavalkya |
| बोले | बोले | said |
| मुसुकाई | मुस्कराकर | with a smile |
| तुम्हहि | आपको | to you |
| बिदित | ज्ञात है | is known |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम की | of Rama, lord of the Raghu lineage |
| प्रभुताई | प्रभुता; महिमा | sovereign greatness; majesty |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.47
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 69
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 69, 69
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।