बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रामकथा मुनीबर्ज बखानी। सुनी महेस परम सुखु मानी।।
मूल पाठ
रामकथा मुनीबर्ज बखानी। सुनी महेस परम सुखु मानी।।
रिषि पूछी हरिभगति सुहाई। कही संभु अधिकारी पाई।।
स्रोत अभिलेख 1.48 · पुस्तक पृ. 69, 70
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनिवर अगस्त्यजीने रामकथा विस्तारसे कही, जिसको महेश्वरने परम सुख मानकर सुना। फिर ऋषिने शिवजीसे सुन्दर हरिभक्ति पूछी और शिवजीने उनको अधिकारी पाकर [रहस्यसहित] भक्तिका निरूपण किया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 69 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रामकथा मुनीबर्ज बखानी। सुनी महेस परम सुखु मानी।।
English explanation
The eminent sage recounted Rama’s story. Shiva listened and experienced supreme joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामकथा | राम की कथा | Rama’s story |
| मुनीबर्ज | श्रेष्ठ मुनि ने | the eminent sage |
| बखानी | वर्णन किया; सुनाई | recounted |
| सुनी | सुनी | heard; listened to |
| महेस | महेश अर्थात शिव ने | Shiva |
| परम | परम; अत्यंत | supreme |
| सुखु | सुख; आनंद | joy |
| मानी | अनुभव किया | experienced |
2 रिषि पूछी हरिभगति सुहाई। कही संभु अधिकारी पाई।।
English explanation
The sage asked about beautiful devotion to Hari. Finding him a worthy recipient, Shiva explained it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिषि | ऋषि ने | the sage |
| पूछी | पूछा; जिज्ञासा की | asked about |
| हरिभगति | हरि की भक्ति | devotion to Hari |
| सुहाई | सुंदर; मनोहर | beautiful; delightful |
| कही | कही; समझाई | explained |
| संभु | शिव ने | Shiva |
| अधिकारी | योग्य पात्र | a qualified recipient |
| पाई | पाकर; मानकर | finding him to be |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.48
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 69
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 69, 70
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।