बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहत सुनत रघुपति गुन गाथा। कछु दिन तहाँ रहे गिरिनाथा।।
मूल पाठ
कहत सुनत रघुपति गुन गाथा। कछु दिन तहाँ रहे गिरिनाथा।।
मुनि सन बिदा मागि त्रिपुरारी। चले भवन सँग दच्छकुमारी।।
स्रोत अभिलेख 1.48 · पुस्तक पृ. 69, 70
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजीके गुणोंकी कथाएँ कहते-सुनते कुछ दिनोंतक शिवजी वहाँ रहे। फिर मुनिसे विदा माँगकर शिवजी दक्षकुमारी सतीजीके साथ घर (कैलास) को चले॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 70 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहत सुनत रघुपति गुन गाथा। कछु दिन तहाँ रहे गिरिनाथा।।
English explanation
Speaking and listening to accounts of Rama’s virtues, Shiva stayed there for some days.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | recounting |
| सुनत | सुनते हुए | listening |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
| गुन | गुणों की | of the virtues |
| गाथा | कथा | accounts; story |
| कछु | कुछ | some |
| दिन | दिन | days |
| तहाँ | वहाँ | there |
| रहे | रहे | stayed |
| गिरिनाथा | पर्वत के स्वामी शिव | Shiva, lord of the mountain |
2 मुनि सन बिदा मागि त्रिपुरारी। चले भवन सँग दच्छकुमारी।।
English explanation
Taking leave of the sage, Shiva, destroyer of Tripura, set off for his abode with Sati, Daksha’s daughter.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनि | the sage |
| सन | से | from |
| बिदा | विदा; जाने की अनुमति | leave to depart |
| मागि | माँगकर | having requested |
| त्रिपुरारी | त्रिपुर का नाश करने वाले शिव | Shiva, destroyer of Tripura |
| चले | चल पड़े | set off |
| भवन | अपने निवास की ओर | toward his abode |
| सँग | साथ | with |
| दच्छकुमारी | दक्ष की पुत्री सती | Sati, daughter of Daksha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.48
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 70
- सहायक विषय
- याज्ञवल्क्य-भरद्वाज-संवाद तथा प्रयाग-माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 69, 70
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