बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रघुबंसिन्ह महुँ जहँ कोउ होई। तेहिं समाज अस कहइ न कोई।।
मूल पाठ
रघुबंसिन्ह महुँ जहँ कोउ होई। तेहिं समाज अस कहइ न कोई।।
कही जनक जसि अनुचित बानी। बिद्यमान रघुकुल मनि जानी।।
स्रोत अभिलेख 1.253 · पुस्तक पृ. 245, 246
भावार्थ
मूल पाठ के बादरघुवंशियोंमें कोई भी जहाँ होता है, उस समाजमें ऐसे वचन कोई नहीं कहता, जैसे अनुचित वचन रघुकुलशिरोमणि श्रीरामजीको उपस्थित जानते हुए भी जनकजीने कहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 245 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रघुबंसिन्ह महुँ जहँ कोउ होई। तेहिं समाज अस कहइ न कोई।।
English explanation
In an assembly where any descendant of Raghu is present, no one speaks in such a manner.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुबंसिन्ह | रघुवंश के लोगों | descendants of Raghu |
| महुँ | में | among |
| जहँ | जहाँ | where |
| कोउ | कोई भी | anyone |
| होई | उपस्थित हो | is present |
| तेहिं | उस | that |
| समाज | सभा में | in the assembly |
| अस | ऐसा | thus |
| कहइ | कहता है | says |
| न | नहीं | not |
| कोई | कोई | anyone |
2 कही जनक जसि अनुचित बानी। बिद्यमान रघुकुल मनि जानी।।
English explanation
Such were the improper words Janaka spoke, knowing that Rama, the jewel of Raghu’s lineage, was present.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कही | कही | spoke |
| जनक | राजा जनक ने | King Janaka |
| जसि | जैसी | such as |
| अनुचित | अनुचित | improper |
| बानी | वाणी | words |
| बिद्यमान | उपस्थित | present |
| रघुकुल | रघु का वंश | Raghu’s lineage |
| मनि | मणि अर्थात राम | jewel, namely Rama |
| जानी | जानते हुए | knowing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.253
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 245
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 245, 246
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।