बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
यह रहस्य काहू नहिं जाना। दिन मनि चले करत गुनगाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह रहस्य किसीने नहीं जाना। सूर्यदेव [भगवान् श्रीरामजीका] गुणगान करते हुए चले। यह महोत्सव देखकर देवता, मुनि और नाग अपने भाग्यकी सराहना करते हुए अपने-अपने घर चले॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 196 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
यह रहस्य काहू नहिं जाना। दिन मनि चले करत गुनगाना।।
देखि महोत्सव सुर मुनि नागा। चले भवन बरनत निज भागा।।
स्रोत अभिलेख 1.196 · पुस्तक पृ. 196, 196
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 यह रहस्य काहू नहिं जाना। दिन मनि चले करत गुनगाना।।
English explanation
No one knew this secret. The sun moved on, singing praises.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| रहस्य | गुप्त बात | secret |
| काहू | किसी ने | anyone |
| नहिं | नहीं | not |
| जाना | जान पाया | knew |
| दिन | दिन का | of the day |
| मनि | रत्न; सूर्य | jewel; the sun |
| चले | आगे चले | moved on |
| करत | करते हुए | while doing |
| गुनगाना | गुणों का गान | singing praises |
2 देखि महोत्सव सुर मुनि नागा। चले भवन बरनत निज भागा।।
English explanation
After witnessing the great celebration, the gods, sages, and serpent beings departed for their homes, recounting their good fortune.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having witnessed |
| महोत्सव | महान उत्सव | great celebration |
| सुर | देवता | gods |
| मुनि | ऋषि-मुनि | sages |
| नागा | नागगण | serpent beings |
| चले | चले गए | departed |
| भवन | अपने निवासों को | to their homes |
| बरनत | वर्णन करते हुए | recounting |
| निज | अपना | their own |
| भागा | सौभाग्य | good fortune |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.196
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 196
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 196, 196
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।