बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
औरउ एक कहउँ निज चोरी। सुनु गिरिजा अति दृढ़ मति तोरी।।
मूल पाठ
औरउ एक कहउँ निज चोरी। सुनु गिरिजा अति दृढ़ मति तोरी।।
काक भुसुंडि संग हम दोऊ। मनुजरूप जानइ नहिं कोऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.196 · पुस्तक पृ. 196, 196
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पार्वती! तुम्हारी बुद्धि [श्रीरामजीके चरणोंमें] बहुत दृढ़ है, इसलिये मैं और भी अपनी एक चोरी (छिपाव) की बात कहता हूँ, सुनो। काकभुशुण्डि और मैं दोनों वहाँ साथ-साथ थे, परन्तु मनुष्यरूपमें होनेके कारण हमें कोई जान न सका॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 196 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 औरउ एक कहउँ निज चोरी। सुनु गिरिजा अति दृढ़ मति तोरी।।
English explanation
Let me tell you one more secret of my own. Listen, Parvati: your understanding is very firm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| औरउ | और भी | one more |
| एक | एक | one |
| कहउँ | मैं कहूँ | let me tell |
| निज | अपनी | my own |
| चोरी | छिपी हुई बात | secret act |
| सुनु | सुनो | listen |
| गिरिजा | हे पार्वती, पर्वतराज की पुत्री | O Parvati, daughter of the mountain king |
| अति | बहुत | very |
| दृढ़ | दृढ़ | firm |
| मति | बुद्धि | understanding |
| तोरी | तुम्हारी | your |
2 काक भुसुंडि संग हम दोऊ। मनुजरूप जानइ नहिं कोऊ।।
English explanation
Kakabhushundi and I were both in human form; no one recognized us.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काक | कौआ | crow |
| भुसुंडि | भुसुंडि, रामभक्त मुनि | Bhushundi, the sage devoted to Rama |
| संग | के साथ | together with |
| हम | हम | we |
| दोऊ | दोनों | both |
| मनुजरूप | मनुष्य के रूप में | in human form |
| जानइ | पहचानता था | recognized |
| नहिं | नहीं | not |
| कोऊ | कोई | anyone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.196
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 196
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 196, 196
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