बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
यह प्रसंग मैं कहा भवानी। हरिमायाँ मोहहिं मुनि ग्यानी।।
मूल पाठ
यह प्रसंग मैं कहा भवानी। हरिमायाँ मोहहिं मुनि ग्यानी।।
प्रभु कौतुकी प्रनत हितकारी।।सेवत सुलभ सकल दुख हारी।।
स्रोत अभिलेख 1.14 · पुस्तक पृ. 148, 149
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[शिवजी कहते हैं कि] हे पार्वती! मैंने यह बतलानेके लिये इस प्रसंगको कहा कि ज्ञानी मुनि भी भगवान्की मायासे मोहित हो जाते हैं। प्रभु कौतुकी (लीलामय) हैं और शरणागतका हित करनेवाले हैं। वे सेवा करनेमें बहुत सुलभ और सब दु:खोंके हरनेवाले हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 149 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 यह प्रसंग मैं कहा भवानी। हरिमायाँ मोहहिं मुनि ग्यानी।।
English explanation
O Bhavani, I have related this episode: even wise sages are deluded by Hari’s maya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| प्रसंग | प्रसंग | episode |
| मैं | मैंने; यहाँ शिव ने | I; here, Shiva as speaker |
| कहा | कहा; सुनाया | related |
| भवानी | हे भवानी; पार्वती | O Bhavani, goddess Parvati |
| हरिमायाँ | हरि की माया से | by Hari’s maya |
| मोहहिं | मोहित होते हैं | are deluded |
| मुनि | मुनि; ऋषि | sages |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise; possessing knowledge |
2 प्रभु कौतुकी प्रनत हितकारी।।सेवत सुलभ सकल दुख हारी।।
English explanation
The Lord delights in wondrous play, benefits those who seek refuge, is readily accessible through service, and removes all suffering.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | भगवान | the Lord |
| कौतुकी | कौतुक और लीला करने वाले | delighting in wondrous play |
| प्रनत | शरणागतों के | of those who seek refuge |
| हितकारी | हित करने वाले | benefactor |
| सेवत | सेवा करने पर | when served |
| सुलभ | सहज उपलब्ध | readily accessible |
| सकल | सभी | all |
| दुख | दुख | suffering |
| हारी | हरने वाले | remover |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 149
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 148, 149
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।