बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
यह प्रगटें अथवा द्विजश्रापा। नास तोर सुनु भानुप्रतापा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे प्रतापभानु! सुनो, इस बातके प्रकट करनेसे अथवा ब्राह्मणोंके शापसे तुम्हारा नाश होगा और किसी उपायसे, चाहे ब्रह्मा और शंकर भी मनमें क्रोध करें, तुम्हारी मृत्यु नहीं होगी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 170 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
यह प्रगटें अथवा द्विजश्रापा। नास तोर सुनु भानुप्रतापा।।
आन उपायँ निधन तव नाहीं। जौं हरि हर कोपहिं मन माहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.166 · पुस्तक पृ. 169, 170
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 यह प्रगटें अथवा द्विजश्रापा। नास तोर सुनु भानुप्रतापा।।
English explanation
Listen, Bhanupratap: disclosure of this secret or a Brahmin’s curse will bring your destruction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह रहस्य | this secret |
| प्रगटें | प्रकट होने पर | upon being disclosed |
| अथवा | या | or |
| द्विजश्रापा | ब्राह्मण के शाप से | through a Brahmin’s curse |
| नास | नाश | destruction |
| तोर | तुम्हारा | your |
| सुनु | सुनो | listen |
| भानुप्रतापा | हे राजा भानुप्रताप | O King Bhanupratap |
2 आन उपायँ निधन तव नाहीं। जौं हरि हर कोपहिं मन माहीं।।
English explanation
No other means will cause your death, even if Vishnu and Shiva become angry at heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आन | अन्य | other |
| उपायँ | उपाय से | by a means |
| निधन | मृत्यु | death |
| तव | तुम्हारी | your |
| नाहीं | नहीं होगी | will not occur |
| जौं | भले ही | even if |
| हरि | विष्णु | Vishnu |
| हर | शिव | Shiva |
| कोपहिं | क्रोधित हों | become angry |
| मन | मन | heart |
| माहीं | में | within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.166
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 170
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 169, 170
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।