बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मैं संकर कर कहा न माना। निज अग्यानु राम पर आना।।
मूल पाठ
मैं संकर कर कहा न माना। निज अग्यानु राम पर आना।।
जाइ उतरु अब देहउँ काहा। उर उपजा अति दारुन दाहा।।
स्रोत अभिलेख 1.54 · पुस्तक पृ. 75, 75
भावार्थ
मूल पाठ के बाद—कि मैंने शङ्करजीका कहना न माना और अपने अज्ञानका श्रीरामचन्द्रजीपर आरोप किया। अब जाकर मैं शिवजीको क्या उत्तर दूँगी? [यों सोचते-सोचते] सतीजीके हृदयमें अत्यन्त भयानक जलन पैदा हो गयी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 75 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मैं संकर कर कहा न माना। निज अग्यानु राम पर आना।।
English explanation
I did not heed Shiva’s words and attributed my own ignorance to Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैंने | I |
| संकर | शंकर अर्थात शिव | Shiva |
| कर | का | of |
| कहा | कही हुई बात | spoken counsel |
| न | नहीं | not |
| माना | माना; स्वीकार किया | heeded |
| निज | अपना | my own |
| अग्यानु | अज्ञान | ignorance |
| राम | राम | Rama |
| पर | पर | to; upon |
| आना | आरोपित किया | attributed |
2 जाइ उतरु अब देहउँ काहा। उर उपजा अति दारुन दाहा।।
English explanation
What answer shall I give when I return now? Terrible anguish arose in her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाइ | जाकर | having gone back |
| उतरु | उत्तर | answer |
| अब | अब | now |
| देहउँ | मैं दूँ | shall I give |
| काहा | क्या | what |
| उर | हृदय में | in the heart |
| उपजा | उत्पन्न हुआ | arose |
| अति | अत्यंत | extremely |
| दारुन | भयंकर | terrible |
| दाहा | संताप; जलन | burning anguish |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.54
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 75
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 75, 75
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।