बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जाना राम सतीं दुखु पावा। निज प्रभाउ कछु प्रगटि जनावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीने जान लिया कि सतीजीको दु:ख हुआ; तब उन्होंने अपना कुछ प्रभाव प्रकट करके उन्हें दिखलाया। सतीजीने मार्गमें जाते हुए यह कौतुक देखा कि श्रीरामचन्द्रजी सीताजी और लक्ष्मणजीसहित आगे चले जा रहे हैं। [इस अवसरपर सीताजीको इसलिये दिखाया कि सतीजी श्रीरामके सच्चिदानन्दमय रूपको देखें, वियोग और दु:खकी कल्पना जो उन्हें हुई थी वह दूर हो जाय तथा वे प्रकृतिस्थ हों]॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 75 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जाना राम सतीं दुखु पावा। निज प्रभाउ कछु प्रगटि जनावा।।
सतीं दीख कौतुकु मग जाता। आगें रामु सहित श्री भ्राता।।
स्रोत अभिलेख 1.54 · पुस्तक पृ. 75, 75
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जाना राम सतीं दुखु पावा। निज प्रभाउ कछु प्रगटि जनावा।।
English explanation
Rama knew that Sati was distressed; he revealed something of his power to her.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जाना | जान लिया | knew |
| राम | राम ने | Rama |
| सतीं | सती ने; शिव की पत्नी ने | Sati, Shiva’s wife |
| दुखु | दुःख | distress |
| पावा | पाया; अनुभव किया | experienced |
| निज | अपना | his own |
| प्रभाउ | प्रभाव; सामर्थ्य | power |
| कछु | कुछ | some |
| प्रगटि | प्रकट करके | revealing |
| जनावा | दिखाया; अवगत कराया | made known |
2 सतीं दीख कौतुकु मग जाता। आगें रामु सहित श्री भ्राता।।
English explanation
As she went along the path, Sati saw a wondrous sight: Rama was ahead with Sita and his brother Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सतीं | सती ने | Sati, Shiva’s wife |
| दीख | देखा | saw |
| कौतुकु | अद्भुत दृश्य | a wondrous sight |
| मग | मार्ग में | along the path |
| जाता | जाते हुए | while going |
| आगें | आगे | ahead |
| रामु | राम | Rama |
| सहित | साथ; सहित | together with |
| श्री | सीता | Sita |
| भ्राता | भाई लक्ष्मण | his brother Lakshmana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.54
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 75
- सहायक विषय
- सतीका भ्रम, श्रीरामजीका ऐश्वर्य और सतीका खेद
- मुद्रित पृष्ठ
- 75, 75
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।