बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनि तव चरन देखि कह राऊ। कहि न सकउँ निज पुन्य प्राभाऊ।।
मूल पाठ
मुनि तव चरन देखि कह राऊ। कहि न सकउँ निज पुन्य प्राभाऊ।।
सुंदर स्याम गौर दोउ भ्राता। आनँदहू के आनँद दाता।।
स्रोत अभिलेख 1.217 · पुस्तक पृ. 214, 215
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाने कहा—हे मुनि! आपके चरणोंके दर्शन कर मैं अपना पुण्य-प्रभाव कह नहीं सकता। ये सुन्दर श्याम और गौर वर्णके दोनों भाई आनन्दको भी आनन्द देनेवाले हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 214 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मुनि तव चरन देखि कह राऊ। कहि न सकउँ निज पुन्य प्राभाऊ।।
English explanation
AI-draft interpretation: The king said, “O sage, having beheld your feet, I cannot describe the power of my own merit.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | हे मुनि विश्वामित्र | O sage Vishvamitra |
| तव | आपके | your |
| चरन | चरण | feet |
| देखि | देखकर | having beheld |
| कह | कहा | said |
| राऊ | राजा जनक ने | King Janaka |
| कहि | कह | describe |
| न | नहीं | not |
| सकउँ | सकता हूँ | am able to |
| निज | अपने | my own |
| पुन्य | पुण्य का | of spiritual merit |
| प्राभाऊ | प्रभाव | power |
2 सुंदर स्याम गौर दोउ भ्राता। आनँदहू के आनँद दाता।।
English explanation
The two beautiful brothers, one dark and one fair, bestow joy even upon joy itself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| स्याम | श्याम वर्ण वाले राम | dark-complexioned Rama |
| गौर | गौर वर्ण वाले लक्ष्मण | fair-complexioned Lakshmana |
| दोउ | दोनों | both |
| भ्राता | भाई | brothers |
| आनँदहू | आनंद को भी | even to joy itself |
| के | के लिए | for |
| आनँद | आनंद | joy |
| दाता | देने वाले | givers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.217
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 214
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणको देखकर जनकजीकी प्रेम-मुग्धता
- मुद्रित पृष्ठ
- 214, 215
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।