बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनिहि मोह मन हाथ पराएँ। हँसहिं संभु गन अति सचु पाएँ।।
मूल पाठ
मुनिहि मोह मन हाथ पराएँ। हँसहिं संभु गन अति सचु पाएँ।।
जदपि सुनहिं मुनि अटपटि बानी। समुझि न परइ बुद्धि भ्रम सानी।।
स्रोत अभिलेख 1.134 · पुस्तक पृ. 143, 144
भावार्थ
मूल पाठ के बादनारद मुनिको मोह हो रहा था, क्योंकि उनका मन दूसरेके हाथ (मायाके वश) में था। शिवजीके गण बहुत प्रसन्न होकर हँस रहे थे। यद्यपि मुनि उनकी अटपटी बातें सुन रहे थे, पर बुद्धि भ्रममें सनी हुई होनेके कारण वे बातें उनकी समझमें नहीं आती थीं (उनकी बातोंको वे अपनी प्रशंसा समझ रहे थे)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 144 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुनिहि मोह मन हाथ पराएँ। हँसहिं संभु गन अति सचु पाएँ।।
English explanation
The sage was deluded, his mind no longer under his control. Shiva’s attendants laughed with great amusement—though the supplied reading ‘सचु’ is uncertain here.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनिहि | मुनि नारद को | the sage Narada |
| मोह | मोह ने घेर रखा था | was overcome by delusion |
| मन | मन | his mind |
| हाथ | हाथ में; नियंत्रण में | in the hands; under control |
| पराएँ | पराए; अपने वश से बाहर | another’s; beyond his own control |
| हँसहिं | हँसते हैं | laugh |
| संभु | शंभु अर्थात शिव के | of Shiva |
| गन | गण; अनुचर | attendants |
| अति | बहुत | greatly |
| सचु | आनंद; नारद की दशा देखकर मिला हँसी का सुख। | Amusement or pleasure at Narada’s predicament. |
| पाएँ | पाकर | having obtained |
2 जदपि सुनहिं मुनि अटपटि बानी। समुझि न परइ बुद्धि भ्रम सानी।।
English explanation
Although the sage heard their odd remarks, he could not grasp their meaning, for his understanding was steeped in delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जदपि | यद्यपि | although |
| सुनहिं | सुनते हैं | he hears |
| मुनि | नारद मुनि | the sage Narada |
| अटपटि | अटपटी; विचित्र | odd; puzzling |
| बानी | बातें | remarks |
| समुझि | समझ में | into understanding |
| न | नहीं | not |
| परइ | आता | comes |
| बुद्धि | बुद्धि | understanding |
| भ्रम | भ्रम में | in delusion |
| सानी | सनी हुई | steeped |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.134
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 144
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 143, 144
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।