बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मिले न कबहुँ सुभट रन गाढ़े। द्विज देवता घरहि के बाढ़े।।
मूल पाठ
मिले न कबहुँ सुभट रन गाढ़े। द्विज देवता घरहि के बाढ़े।।
अनुचित कहि सब लोग पुकारे। रघुपति सयनहिं लखनु नेवारे।।
स्रोत अभिलेख 1.276 · पुस्तक पृ. 264, 265
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपको कभी रणधीर बलवान् वीर नहीं मिले। हे ब्राह्मण देवता! आप घरहीमें बड़े हैं। यह सुनकर 'अनुचित है, अनुचित है कहकर सब लोग पुकार उठे। तब श्रीरघुनाथजीने इशारेसे लक्ष्मणजीको रोक दिया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 265 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मिले न कबहुँ सुभट रन गाढ़े। द्विज देवता घरहि के बाढ़े।।
English explanation
You have never faced true warriors in fierce battle. Revered Brahmin, you are mighty only at home.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिले | मिले; सामना हुआ | encountered |
| न | नहीं | not |
| कबहुँ | कभी | ever |
| सुभट | सच्चे वीर योद्धा | valiant warriors |
| रन | युद्ध में | in battle |
| गाढ़े | घोर; कठिन | fierce; hard-fought |
| द्विज | हे ब्राह्मण | O Brahmin |
| देवता | देवता; पूज्य महोदय | revered sir |
| घरहि | घर ही | home alone |
| के | के | of |
| बाढ़े | बड़े बने हुए; शेखी बघारने वाले | self-important; boasting of might |
2 अनुचित कहि सब लोग पुकारे। रघुपति सयनहिं लखनु नेवारे।।
English explanation
Everyone cried out, “This is improper!” Rama stopped Lakshmana with a gesture.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनुचित | अनुचित; अशोभनीय | improper; unseemly |
| कहि | कहकर | saying |
| सब | सभी | all |
| लोग | लोग | people |
| पुकारे | पुकार उठे | cried out |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी श्रीराम ने | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| सयनहिं | संकेत से ही | with a gesture alone |
| लखनु | लक्ष्मण को | Lakshmana |
| नेवारे | रोका | restrained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.276
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 265
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 264, 265
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।