बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मानस मूल मिली सुरसरिही। सुनत सुजन मन पावन करिही।।
मूल पाठ
मानस मूल मिली सुरसरिही। सुनत सुजन मन पावन करिही।।
बिच बिच कथा बिचित्र बिभागा। जनु सरि तीर तीर बन बागा।।
स्रोत अभिलेख 1.4 · पुस्तक पृ. 63, 63
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस (कीॢतरूपी सरयू) का मूल मानस (श्रीरामचरित) है और यह [रामभक्तिरूपी] गङ्गाजीमें मिली है, इसलिये यह सुननेवाले सज्जनोंके मनको पवित्र कर देगी। इसके बीच-बीचमें जो भिन्न-भिन्न प्रकारकी विचित्र कथाएँ हैं वे ही मानो नदीतटके आस-पासके वन और बाग हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 63 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मानस मूल मिली सुरसरिही। सुनत सुजन मन पावन करिही।।
English explanation
This story-river, originating in the Manas lake and joining the Ganges, will purify the minds of good people who hear it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मानस | मानस-सरोवर | the Manas lake |
| मूल | जिसका उद्गम है | as its source |
| मिली | मिली हुई | joined |
| सुरसरिही | गंगा से | with the Ganges |
| सुनत | सुनने पर | upon hearing |
| सुजन | सज्जनों के | of good people |
| मन | मन को | the minds |
| पावन | पवित्र | pure |
| करिही | करेगी | will make |
2 बिच बिच कथा बिचित्र बिभागा। जनु सरि तीर तीर बन बागा।।
English explanation
The varied, wondrous episodes throughout the story are like forests and gardens along the riverbanks.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिच | बीच | at intervals |
| बिच | बीच में | throughout |
| कथा | कथा के | of the story |
| बिचित्र | विविध और अद्भुत | varied and wondrous |
| बिभागा | प्रसंग | episodes |
| जनु | मानो | as though |
| सरि | नदी के | of the river |
| तीर | तट पर | on the banks |
| तीर | तट पर जगह-जगह | all along the banks |
| बन | वन | forests |
| बागा | बाग | gardens |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 63
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 63, 63
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।