बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जुग बिच भगति देवधुनि धारा। सोहति सहित सुबिरति बिचारा।।
मूल पाठ
जुग बिच भगति देवधुनि धारा। सोहति सहित सुबिरति बिचारा।।
त्रिबिध ताप त्रासक तिमुहानी। राम सरुप सिंधु समुहानी।।
स्रोत अभिलेख 1.4 · पुस्तक पृ. 63, 63
भावार्थ
मूल पाठ के बाददोनोंके बीचमें भक्तिरूपी गङ्गाजीकी धारा ज्ञान और वैराग्यके सहित शोभित हो रही है। ऐसी तीनों तापोंको डरानेवाली यह तिमुहानी नदी रामस्वरूपरूपी समुद्रकी ओर जा रही है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 63 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जुग बिच भगति देवधुनि धारा। सोहति सहित सुबिरति बिचारा।।
English explanation
Between these two rivers, the Ganges-stream of devotion shines, accompanied by sound detachment and reflection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जुग | दोनों नदियों के | the two rivers |
| बिच | बीच | between |
| भगति | भक्ति-रूपी | representing devotion |
| देवधुनि | देवनदी गंगा की | of the celestial Ganges |
| धारा | धारा | stream |
| सोहति | सुशोभित होती है | shines beautifully |
| सहित | साथ लिए हुए | accompanied by |
| सुबिरति | उत्तम वैराग्य | sound detachment |
| बिचारा | विवेकपूर्ण विचार | discerning reflection |
2 त्रिबिध ताप त्रासक तिमुहानी। राम सरुप सिंधु समुहानी।।
English explanation
This confluence of three rivers, which puts the three kinds of suffering to flight, faces the ocean that is Rama’s own being.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| त्रिबिध | तीन प्रकार के | of three kinds |
| ताप | दुःखों को | sufferings |
| त्रासक | डराने वाला | putting to flight |
| तिमुहानी | तीन नदियों का संगम | confluence of three rivers |
| राम | श्रीराम का | Rama’s |
| सरुप | स्वरूप | essential being |
| सिंधु | समुद्र | ocean |
| समुहानी | की ओर उन्मुख | facing toward |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 63
- सहायक विषय
- मानसका रूप और माहात्म्य
- मुद्रित पृष्ठ
- 63, 63
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।