बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मातु पितुहि बहुबिधि समुझाई। चलीं उमा तप हित हरषाई।।
मूल पाठ
मातु पितुहि बहुबिधि समुझाई। चलीं उमा तप हित हरषाई।।
प्रिय परिवार पिता अरु माता। भए बिकल मुख आव न बाता।।
स्रोत अभिलेख 1.73 · पुस्तक पृ. 90, 90
भावार्थ
मूल पाठ के बादमाता-पिताको बहुत तरहसे समझाकर बड़े हर्षके साथ पार्वतीजी तप करनेके लिये चलीं। प्यारे कुटुम्बी, पिता और माता सब व्याकुल हो गये। किसीके मुँहसे बात नहीं निकलती॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 90 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मातु पितुहि बहुबिधि समुझाई। चलीं उमा तप हित हरषाई।।
English explanation
After reassuring her parents in many ways, Uma joyfully departed to practice austerities.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मातु | माता को | her mother |
| पितुहि | पिता को | her father |
| बहुबिधि | अनेक प्रकार से | in many ways |
| समुझाई | समझाकर | having reassured |
| चलीं | चल पड़ीं | departed |
| उमा | पार्वती | Uma, Parvati |
| तप | तपस्या | austerities |
| हित | के लिए | for |
| हरषाई | प्रसन्न होकर | joyfully |
2 प्रिय परिवार पिता अरु माता। भए बिकल मुख आव न बाता।।
English explanation
Her dear family, father, and mother became distraught; no words would come from their mouths.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रिय | प्रिय | dear |
| परिवार | परिजन | family members |
| पिता | पिता | father |
| अरु | और | and |
| माता | माता | mother |
| भए | हो गए | became |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| मुख | मुख से | from their mouths |
| आव | निकलती थी | would come forth |
| न | नहीं | not |
| बाता | बात; वचन | words |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.73
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 90
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 90, 90
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