बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मागहु बर बहु भाँति लोभाए। परम धीर नहिं चलहिं चलाए।।
मूल पाठ
मागहु बर बहु भाँति लोभाए। परम धीर नहिं चलहिं चलाए।।
अस्थिमात्र होइ रहे सरीरा। तदपि मनाग मनहिं नहिं पीरा।।
स्रोत अभिलेख 1.145 · पुस्तक पृ. 152, 153
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्होंने इन्हें अनेक प्रकारसे ललचाया और कहा कि कुछ वर माँगो। पर ये परम धैर्यवान् [राजा-रानी अपने तपसे किसीके] डिगाये नहीं डिगे। यद्यपि उनका शरीर हड्डियोंका ढाँचामात्र रह गया था, फिर भी उनके मनमें जरा भी पीड़ा नहीं थी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 152 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मागहु बर बहु भाँति लोभाए। परम धीर नहिं चलहिं चलाए।।
English explanation
They enticed them in many ways, saying, ‘Ask for a boon,’ but the steadfast ascetics did not waver despite attempts to move them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मागहु | माँगो | ask for |
| बर | वरदान | a boon |
| बहु | अनेक | many |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| लोभाए | लुभाया | enticed |
| परम | अत्यंत | supremely |
| धीर | धैर्यवान | steadfast |
| नहिं | नहीं | not |
| चलहिं | विचलित होते | waver |
| चलाए | विचलित किए जाने पर भी | even when urged to waver |
2 अस्थिमात्र होइ रहे सरीरा। तदपि मनाग मनहिं नहिं पीरा।।
English explanation
Their bodies were reduced to mere bones, yet there was not the slightest anguish in their minds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस्थिमात्र | केवल हड्डियाँ | mere bones |
| होइ | होकर | having become |
| रहे | रह गए | remained |
| सरीरा | शरीर | bodies |
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| मनाग | तनिक भी | even slightly |
| मनहिं | मन में | in the mind |
| नहिं | नहीं | not |
| पीरा | पीड़ा | pain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.145
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 152
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 152, 153
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।